प्रसंगवश : सड़क दुर्घटनाओं की क्षति जीडीपी का 3.14 फीसद

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Published By Deepak Mishra
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कांतिलाल मांडोत, वरिष्ठ पत्रकार

 

भारत तेजी से विकसित होता देश है। आधुनिक सड़कें बन रही हैं, एक्सप्रेस-वे तैयार हो रहे हैं, वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसके साथ सड़क दुर्घटनाओं का संकट भी भयावह रूप ले चुका है। आज सड़क हादसे केवल यातायात की समस्या नहीं रह गए हैं, बल्कि यह राष्ट्रीय चिंता का विषय बन चुके हैं। हर दिन सैकड़ों परिवार अपने प्रियजनों को खो रहे हैं। कोई बच्चा अनाथ हो रहा है, कोई माता-पिता अपने जवान बेटे को खो रहे हैं, तो कोई परिवार जीवनभर के लिए अपंगता और आर्थिक संकट में डूब जाता है। यही कारण है कि भारत का सुप्रीम कोर्ट भी सड़क सुरक्षा को लेकर लगातार चिंता जता रहा है।

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारत में ‘लेन ड्राइविंग’ जैसी कोई अवधारणा ही नहीं रह गई है और यही सड़क दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण है। अदालत ने सार्वजनिक वाहनों में ट्रैकिंग डिवाइस और पैनिक बटन नहीं लगाए जाने पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि नियम बनने के बावजूद देश में एक प्रतिशत से भी कम सार्वजनिक वाहनों में ये सुरक्षा उपकरण लगे हैं। यह स्थिति बताती है कि सड़क सुरक्षा के नियम केवल कागजों तक सीमित होकर रह गए हैं।

भारत में सड़क दुर्घटनाओं का आंकड़ा अत्यंत भयावह है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार वर्ष 2024 में लगभग 1 लाख 99 हजार लोगों की मौत सड़क हादसों में हुई। इसका अर्थ है कि प्रतिदिन औसतन 546 लोगों की जान चली जाती है। यदि इसे घंटे के हिसाब से देखें तो भारत में हर घंटे लगभग 23 लोगों की मृत्यु सड़क दुर्घटनाओं में होती है। यानी लगभग हर ढाई मिनट में एक व्यक्ति सड़क हादसे का शिकार बन रहा है। यह आंकड़ा किसी युद्ध या बड़ी महामारी से कम नहीं है। सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली सामाजिक और आर्थिक क्षति भारत की जीडीपी का लगभग 3.14 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। इसका मतलब यह है कि सड़क हादसे केवल जान ही नहीं ले रहे, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी कमजोर कर रहे हैं।

भारत में सड़क दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण यातायात नियमों की अनदेखी है। लोग सड़क पर वाहन चलाते समय अनुशासन का पालन नहीं करते। लेन ड्राइविंग का पालन लगभग नहीं के बराबर होता है। कोई वाहन अचानक दूसरी लेन में घुस जाता है, कोई बिना संकेत दिए मुड़ जाता है, तो कोई तेज रफ्तार में ओवरटेक करता है।

यही कारण है कि सुप्रीम कोर्ट ने विशेष रूप से लेन अनुशासन की कमी को दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बताया।
देश में अधिकांश लोग हेलमेट और सीट बेल्ट को अब भी गंभीरता से नहीं लेते। दोपहिया वाहन चालकों में हेलमेट न पहनने की आदत सबसे खतरनाक साबित हो रही है। आंकड़ों के अनुसार सड़क दुर्घटनाओं में सबसे अधिक मौतें दोपहिया वाहनों से होती हैं। कुल मौतों में लगभग 48.3 प्रतिशत हिस्सा दोपहिया दुर्घटनाओं का है। यह दर्शाता है कि बाइक और स्कूटर चलाते समय लोग सुरक्षा मानकों को नजरअंदाज कर रहे हैं।

पैदल चलने वाले भी सड़क हादसों का बड़ा शिकार बन रहे हैं। कुल मौतों में लगभग 14.7 प्रतिशत पैदल यात्रियों की होती हैं। शहरों में फुटपाथों की कमी, अवैध पार्किंग और अनियंत्रित ट्रैफिक इसके प्रमुख कारण हैं। वहीं कार दुर्घटनाओं का हिस्सा भी 13.6 प्रतिशत है। तेज गति, मोबाइल फोन का उपयोग, शराब पीकर वाहन चलाना और गलत दिशा में वाहन चलाना कार दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बनते जा रहे हैं। (यह लेखक के निजी विचार हैं)

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