अयोध्या: प्राण प्रतिष्ठा में 12.29.08 मिनट के बाद 84 सेकेंड का मुहूर्त बेहद खास, पृथ्वी, चंद्र, सूर्य की तरह स्थापित रहेगा राम मंदिर

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Edited By Amrit Vichar
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अयोध्या, अमृत विचार। पौष शुक्ल द्वादशी दिन सोमवार मृगशिर्ष नक्षत्र के मेष लग्न में राम प्रतिष्ठा का मुहूर्त दिया गया है। इसमें समय 12.29.08 के बाद 84 सेकेंड का काल खंड मुख्य है। ये बात काशी के प्रसिद्ध विद्वान गणेश्वर शास्त्री द्रविण ने मंगलवार को यहां कही। वो अनुष्ठान होने के बाद अमृत विचार से वार्ता कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि इस मुहूर्त के मेष लग्न में गुरु विराजमान है। वह पूर्ण बाली है। मित्र राशि का है। उसकी दृष्टि लग्न से पांचवें स्थान और सातवें स्थान और नवें स्थान पर पड़ेगी। इस मुहूर्त में लोगों के लिए मानसिक प्रवृत्ति अच्छी होगी । नवें स्थान पर पूर्व की दृष्टि होने से लोगों का भाग्य उदय होगा। धर्म कर्म की ओर रुचि होगी। जो गुरु का मुख्य फल है। 

ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि लग्न में यदि गुरु आ जाता है तो एक लाख दोषों का निवारण करता है। लग्न के दूसरे स्थान में उच्च का चन्द्र है। जो ऐश्वर्य प्रदान करता है। यहां पर आर्थिक बृद्धि भी प्रभु की कृपा से होगी। लग्न के छठवें स्थान पर केतु है जो शत्रु नाश करता है। 11वें स्थान में शनि है इसका भी बहुत ही अच्छा फल है। शत्रु परास्त होंगे। इसी तरह लग्न भी शुभ कार्य का प्रतिफल है। 

उन्होंने कहा कि काशी में भगवान राम जब यात्रा करके आए थे। उस समय गंगा के किनारे रामघाट का निर्माण किया था। जहां आज भी रामघाट है। अर्थात गुरु वशिष्ठ ने जो रामघाट का मुहूर्त दिया। वह इतना प्रबल था, कि साढे 17 लाख वर्ष हो जाने के बाद भी आज वह रामघाट स्थित है। इसी तरह  इस सृष्टि में जब तक पृथ्वी, सूर्य और चंद्र रहेगा तब तक यह राम मंदिर भी स्थापित रहेगा। राम मंदिर के साथ दिवसीय अनुष्ठान मंगलवार से प्रारंभ हो गया है। अनुष्ठान में रामानंद संप्रदाय के तहत पूर्ण विधि विधान की परंपराओं को निभाया जा रहा है। 

मंदिर के पूर्ण निर्माण पर सन्यासी से होगा कलश स्थापना

विद्वान गणेश्वर शास्त्री द्रविण ने बताया कि मंदिर में मूर्ति की स्थापना दो तरह से की जाती है। कहीं- कहीं पूर्ण मंदिर बनने के बाद मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के साथ कलश भी स्थापित करने की परिस्थिति रहती है। इस मंदिर में मूर्ति स्थापना के साथ एक संन्यासी के द्वारा मंदिर के ऊपरी भाग में कलश की भी स्थापना कर दी जाती है। जिस मंदिर में शिखर का कार्य शेष रहता है उसे पर कलश स्थापना का कार्य बाद में किया जाता है। इसी तरह इस राम मंदिर में भी मूर्ति स्थापना के बाद जब यह कार्य पूरा हो जाएगा। कलश की स्थापना एक संन्यासी के द्वारा की जाएगी। 

उन्होंने कहा कि कलश की स्थापना गृहस्थ नहीं करता है। बताते चले कि निर्माणधीन राम मंदिर में रामलला के प्राण प्रतिष्ठा की मुहूर्त को लेकर महाराष्ट्र के युवक ने काशी के विद्वान गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ को एक पत्र के माध्यम से अधूरे मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा और मुहूर्त की तारीख को लेकर जबाब मांगा है। जिस पर उन्होंने लिखित जवाब भेजा है। इस पत्र में मुहूर्त और प्राण प्रतिष्ठा का राजधानी संबंधित ज्योतिष शास्त्र के तहत जवाब दिया है।

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