शाहजहांपुर: लोकसभा चुनाव में भाजपा और महागठबंधन में होगी जोर आजमाइश, कांग्रेस में बेचैनी

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Published By Vikas Babu
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श्याम मिश्र, शाहजहांपुर। लोक सभा चुनाव का शोर मंद-मंद सुनाई देने लगा है। प्रमुख राजनीतिक पार्टियां चुनाव की तैयारियों में जुटी हैं। अखिलेश यादव के 11 सीटों पर महागठबंधन के बैनर तले चुनाव लड़ने के बयान के बाद से शाहजहांपुर सीट पर भाजपा बनाम महागठबंधन के बीच मुख्य मुकाबला होने के आसार बन रहे हैं। 

अब तक यहां नौ बार कांग्रेस, तीन बार भाजपा, दो-दो बार सपा, जनता दल और एक बार जनता पार्टी का प्रत्याशी विजयी हुआ है। इस बार कांग्रेस, सपा व अन्य पार्टियों के पास दावेदारों की संख्या सीमित है। जबकि भाजपा के पास कई कद्दावर नेताओं की दावेदारी है। तमाम नेताओं ने चुनाव प्रचार शुरू भी कर दिया है।

बीते दो चुनावों से यहां जीत दर्ज करती आ रही भाजपा एक समय में शाहजहांपुर की धरती पर जीत हासिल करने के लिए तरसती थी। उस दौर में सत्यपाल सिंह ने भाजपा को यहां पहली बार जीत दिलाई थी। उन्होंने कद्दावर कांग्रेस नेता जितेंद्र प्रसाद को हराकर सबको चौंका दिया था। 2024 में जीत कायम रखने के लिए भाजपा ने ताकत झोंकना शुरू कर दी है। जबकि सपा और कांग्रेस बीते चुनावों में हुई हार को जीत में बदलने के लिए ताकत लगा रही है। कई चुनावों से हार का मुंह देख रही कांग्रेस में जीत के लिए झटपटाहट है।

शाहजहांपुर से चुनाव लड़ा है। देखा जाए तो कांग्रेस जीत का स्वाद लंबे समय से नहीं चख पाई। करीब 19 साल से कांग्रेस जीत से काफी दूर है। इसी तरह से देखा जाए तो बसपा का अब तक खाता ही नहीं खुला या यूं कहें कि बसपा सांसद का यहां सूखा पड़ा है। हालांकि सपा ने जरूर दो बार जीत हासिल की है। 

शाहजहांपुर में भाजपा के अरुण कुमार सागर मौजूदा सांसद हैं। इसके अलावा योगी सरकार में तीन-तीन मंत्री भी इसी शहर से हैं। तीनों मंत्री यूपी की राजनीति में अपने आप में एक बड़ा नाम हैं। राजनीति के जानकारों की मानें तो विधानसभा चुनाव में परिणाम को देखते हुए मोदी सरकार शाहजहांपुर को 2024 से पहले एक तोहफा भी देने जा रही है। चर्चा है कि 2014 में शाहजहांपुर सांसद चुनी गईं कृष्णा राज की तरह अरुण सागर को भी केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है।

शाहजहांपुर में पहला चुनाव 1952 में हुआ था, उस वक्त शाहजहांपुर में लोकसभा की दो सीटें होती थीं। एक सीट से कांग्रेस के गणेशी लाल और दूसरी सीट से रामेश्वर नवेंटिया ने चुनाव जीता था। 1957 में भी दो सीटों पर लोकसभा का चुनाव हुआ और तब एक सीट से कांग्रेस के नारायणदीन और दूसरी सीट से सेठ विशनचंद्र ने चुनाव जीता। 

1962 में शाहजहांपुर को एक ही लोकसभा सीट बनाया गया, तब कांग्रेस से लाखनदास, 1967 में कांग्रेस से पीके खन्ना, 1971, 1980, 1984 में कांग्रेस से जितेंद्र प्रसाद जीते। 1996 में राममूर्ति सिंह वर्मा कांग्रेस से सांसद बने। कांग्रेस से 1999 में जितेंद्र प्रसाद जीते। 2001 में उनके निधन के बाद शाहजहांपुर लोकसभा सीट पर उपचुनाव हुआ। 

2002 में कांग्रेस ने कांताप्रसाद को प्रत्याशी बनाया। सपा ने जब राममूर्ति सिंह वर्मा को चुनाव मैदान में उतारा। इस चुनाव में राममूर्ति सिंह वर्मा जीत गए थे। 2004 में जितिन प्रसाद ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीते। इसके बाद 2009 में सपा ने मिथलेश कुमार की प्रत्याशी घोषित किया। मिथलेश कुमार चुनाव जीते। 2014 के चुनाव में मोदी लहर में पूर्व मंत्री कृष्णाराज के सिर शाहजहांपुर का ताज सजा। 2019 के चुनाव में भाजपा के अरुण सागर चुनाव जीतकर सांसद बने। अब 2024 का रण होने वाला है। सबकी निगाहें गठबंधन और भाजपा प्रत्याशी पर टिकी हैं। 

1989 के चुनाव परिणामों ने सबको चौंका दिया था
शाहजहांपुर की राजनीति में सत्यपाल सिंह का नाम 1989 के चुनाव से चर्चा में आ गया। जब भी लोक सभा चुनाव होता है तो सत्यपाल सिंह का नाम आता है। जमीनी राजनीति करने वाले सत्यपाल सिंह संघर्ष करते-करते जनता दल के टिकट पर पहली बार 1989 में सांसद बने थे। उन्होंने कांग्रेस के कद्दावर नेता जितेंद्र प्रसाद को हराया था। 

उस दौरान जितेंद्र प्रसाद की हार चर्चा का विषय बन गई थी। इसके बाद 1991 में सत्यपाल सिंह जनता दल के टिकट पर ही दोबारा जीते, इस बार उन्होंने बीजेपी के निर्भयचंद्र सेठ को हराया था। भाजपा शाहजहांपुर लोकसभा सीट पर जीत के लिए बहुत छटपटा रही थी। इसी बीच सत्यपाल सिंह 1998 में भाजपा में शामिल हो गए और चुनाव जीतकर उन्होंने भाजपा को जीत दिलाई। 

2014 में 2.35 लाख से जीती थीं कृष्णाराज 
2014 के बाद से लगातार दस साल से यहां भाजपा जीत रही है। 2014 में कृष्णाराज दो लाख 35 हजार वोटों से जीती थीं। उन्हें 5 लाख 25 हजार 132 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर बसपा से उम्मेद सिंह रहे थे। उन्हें 2 लाख 89 हजार 603 वोट मिले थे। सपा का नंबर तीन थी। सपा प्रत्याशी मिथलेश कुमार को 2 लाख 42 हजार 913 वोट मिले थे। कांग्रेस प्रत्याशी चेतराम को 27 हजार वोट मिले थे। 2014 के चुनाव में शाहजहांपुर सीट से कुल 14 प्रत्याशी चुनाव लड़े थे। कृष्णा राज मोदी सरकार में मंत्री भी बनीं थी।

अरुण सागर को मिले 58.53 प्रतिशत वोट
शाहजहांपुर में दो बार कमल खिला चुकी भाजपा ने 2019 में भी शानदार प्रदर्शन किया। 2014 के बाद लगातार भाजपा दो बार जीती। 2014 में कृष्णा राज सांसद चुनी गईं और 2019 के चुनाव में अरुण सागर चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे। अरुण सागर को 58.53 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि बसपा के अमर चंद्र जौहर को 35.73 प्रतिशत वोट हासिल हुए थे। तीसरे नंबर पर रही कांग्रेस को महज तीन प्रतिशत वोटों पर ही संतोष करना पड़ा था। कांग्रेस ने ह्मस्वरूप सागर को चुनाव मैदान में उतारा था।

ऐतिहासिक रूप से काफी समृद्ध है जिला
शहीदों की नगरी कहा जाने वाला शाहजहांपुर ऐतिहासिक रूप से काफी समृद्ध है। यहां भगवान परशुराम की जन्मस्थली है। शाहजहांपुर के शहीद अशफाकउल्ला, बिस्मिल, रोशन सिंह, पंडित राम प्रसाद बिस्मिल जैसे आजादी के दीवनों ने अंग्रेजों से लड़ाई लड़कर देश के लिए कुर्बानी दी थी। इनकी भी जन्मस्थली यहां मौजूद है। राजनीतिक दृष्टिकोण के हिसाब से भी ये जिला काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। 

शाहजहांपुर के रहने वाले स्व. जितेंद्र प्रसाद ने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीति में जिले का नाम बुलंदियों पर पहुंचाया था। इसके अलावा जितेंद्र प्रसाद के बेटे जितिन प्रसाद भी कभी राहुल गांधी के करीबी नेताओं में शामिल थे। हालांकि अब जितिन योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। यूपी की राजनीति में सुरेश खन्ना का नाम भी बेहद अहम है। सुरेश खन्ना शाहजहांपुर से लगातार आठ बार विधायक चुने जा चुके हैं। वर्तमान में सुरेश खन्ना योगी सरकार में वित्त एसं संसदीय कार्यमंत्री भी हैं।

मुस्लिम मतदाता माने जाते हैं निर्णायक
लोकसभा चुनाव को लेकर एक बार फिर राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी बिसात बिछा दी है। 2019 के चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें तो यहां करीब 21 लाख 12 हजार 860 लोकसभा के वोटर हैं। जातीय समीकरण की बात करें तो यहां करीब 20 फीसदी जनसंख्या मुस्लिम समुदाय की है। इसके अलावा पिछड़ी जातियों का भी यहां वर्चस्व है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो मुस्लिम वोटर ही शाहजहांपुर में जीत-हार तय करता है।

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