बरेली: सावधान! रमजान और होली पर रंगीन कचरी बिगाड़ न दे सेहत का मिजाज
एफएसडीए की टीमों ने नहीं लिए रंगीन कचरी-पापड़ के सैंपल
बरेली, अमृत विचार। रमजान और होली से पहले बाजार में रंगीन कचरी और पाकड़ की बिक्री शुरू हो गई है। कचरी और पापड़ में स्वास्थ्य को हानि पहुंचाने वाले रंग मिलाए जाते हैं लेकिन अभी तक खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने इनके नमूने लेना शुरू नहीं किया है। टीमें अभियान चलाकर सिर्फ दूध से बने खाद्य पदार्थों के ही नमूने ले रही हैं।
रमजान की शुरुआत अगले सप्ताह से हो जाएगी। वहीं होली 25 मार्च को है। इसलिए इस महीने कचरी और पापड़ की अधिक खपत होने की संभावना है। कुतुबखाना, शहामतगंज, किला, पुराना शहर, सैलानी जैसे शहर के प्रमुख बाजारों में रंगीन कचरी और पापड़ की जमकर बिक्री हो रही है। पिछले कई बरसों में रंगीन कचरी और पापड़ के नमूने जांच में फेल हो चुके हैं। इस बार भी त्योहार के दौरान बाजार में मांग अधिक होने पर अधिक मुनाफा कमाने के लिए मिलावटखोर इसमें केमिकल मिलाकर बेच रहे हैं।
लिवर संबंधी बीमारियां दे सकती हैं दस्तक
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. राहुल वाजपेई के अनुसार रंग युक्त खाद्य पदार्थ खाने से लिवर संबंधी बीमारियों से ग्रसित होने का खतरा ज्यादा है। इन रंगों को खतरनाक केमिकल का उपयोग कर तैयार किया जाता है। इसके लगातार सेवन से पेट संबंधी गंभीर बीमारियां भी हो जाती हैं। जितना हो सके इस प्रकार के खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए।
दूध और पनीर की हो रही सैंपलिंग
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने खाद्य पदार्थों में मिलावटखोरी रोकने के लिए अभियान शुरू किया गया है, लेकिन दूध, पनीर और खोया आदि के नमूने ही अब तक लिए गए हैं। पर्याप्त स्टाफ होने के बावजूद एक दिन में तीन से चार सैंपल ही लिए जा रहे हैं। पिछले तीन दिन से विभाग का अभियान भी ठंडा पड़ा हुआ है।
विभाग की तरफ से सैंपलिंग की कार्रवाई लगातार जारी है। मिलावटखोरी किसी भी सूरत में नहीं होने दी जाएगी। अगर कहीं रंगीन कचरी बाजार में बिक रही है तो उसकी सैंपलिंग कराई जाएगी। -अपूर्व श्रीवास्तव, सहायक आयुक्त (खाद्य) द्वितीय, एफएसडीए
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