मुरादाबाद : सीएचसी प्रभारी सहित आठ लोगों ने किया 10 लाख का घोटाला
मुरादाबाद,अमृत विचार। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) में स्वास्थ्य विभाग में एक बड़ा घोटाला सामने आया है। इस मिशन के तहत लगभग दस लाख रुपये की रकम का बंदरबांट हुआ है। इस घोटाले में तीन स्वास्थ्य केंद्रों के दो चिकित्सक सहित आठ लोगों के नाम सामने आए हैं। हैरत की बात यह है कि जिस मामले …
मुरादाबाद,अमृत विचार। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) में स्वास्थ्य विभाग में एक बड़ा घोटाला सामने आया है। इस मिशन के तहत लगभग दस लाख रुपये की रकम का बंदरबांट हुआ है। इस घोटाले में तीन स्वास्थ्य केंद्रों के दो चिकित्सक सहित आठ लोगों के नाम सामने आए हैं। हैरत की बात यह है कि जिस मामले को शासन गंभीरता से ले रही है, स्थानीय अधिकारी लगातार उसे दबाने के प्रयास में लगे हैं।
शासन से जारी पत्र को 20 दिन हो चुके हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर इस करतूत को करने वाले जिम्मेदारों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। अब जब यह मामला फिर से सुर्खियों में आया है तो अधिकारियों के होश उड़ गए हैं।
एनएचएम में घपले की सुगबुगाहट के रूप में पहली बार यह मामला दो साल पहले उजागर हुआ था। 26 जुलाई 2018 को इस मामले पर जांच शुरू हुई थी। 21 जून 2019 को जिला अधिकारी की अध्यक्षता में बनी कमेटी की रिपोर्ट में यह घपला सही पाया गया था। लखनऊ की कांकरेंट आडिटर मैसर्स शर्मा उत्तम एंड कंपनी चार्टर्ड अकाउंटेंट की रिपोर्ट में भी अनियमितताओं को सही पाया गया था।
रिपोर्ट में बताया गया कि एनएचम के तहत जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) व अन्य मदों में नौ लाख 92 हजार 886 रुपये का गबन किया गया है। यह सरकारी रुपया लाभार्थियों के अकाउंट के बजाय तीन स्वास्थ्य केंद्रों के डाक्टर सहित आठ कर्मचारियों ने अपने खाते में ट्रांसफर कर लिया।
इनमें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कांठ के चिकित्सा अधीक्षक डा. मृणाल राठी, स्वास्थ्य पर्यवेक्षक भगवान सिंह, ब्लॉक लेखा प्रबंधक नरेंद्र कश्यप, मूंढापांडे स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डा. नरेंद्र कुमार, फार्मासिस्ट कुलदीप कुमार, वार्ड ब्वॉय कुलदीप कुमार, ठाकुरद्वारा स्वास्थ्य केंद्र के पर्यवेक्षक रामपाल सिंह और ब्लॉक लेखा प्रबंधक आशू गुप्ता शामिल हैं।
चौंकाने वाली बात तो यह है कि दो साल पहले उजागर हुए इस मामले की जब परत खुली तो इसी साल मई में शासन ने जिला कमेटी को कसूरवार स्टाफ पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। उसके बाद पांच और महीने बीत गए, शासन के पत्र को स्थानीय अधिकारियों ने भी ठेंगा दिखाते हुए दबाने का प्रयास किया है। अब तक इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया है और कोई कार्रवाई भी अमल में नहीं लाई गई है। एनएचएम के मिशन निदेशक अपर्णा उपाध्याय ने 29 सितंबर को फिर सीएमओ को पत्र जारी कर इसपर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
किस किसने कितनी रकम खाते में की ट्रांसफर
पदनाम राशि
चिकित्सा अधीक्षक, कांठ 4,72,918
स्वास्थ्य पर्यवेक्षक, कांठ 79,718
ब्लॉक लेखा प्रबंधक कांठ 20,999
चिकित्सा प्रभारी, मूंढापांडे 67,605
फार्मासिस्ट, मूंढापांडे 83,504
वार्ड ब्वाय, मूंढापांडे 1,29,400
स्वास्थ्य पर्यवेक्षक, ठाकुरद्वारा 1,25,942
ब्लॉक लेखा प्रबंधक, ठाकुरद्वारा 12,800
कई नियमों को रखा था ताक पर
रिपोर्ट के अनुसार इसमें कई अनियमितताएं सामने आईं। भुगतान टुकड़ों में होने से टेंडर के प्रावधानों का उल्लंघन किया। टीडीएस के प्रावधानों की भी अवहेलना भी सामने आई है। जननी सुरक्षा योजना के लाभार्थियों को प्रसव के लगभग दो वर्ष के बाद भुगतान किए जाने की पुष्टि हुई है। जांच में यह भी पाया गया कि लाभार्थी को नौ महीने तक इस तरह के लाभ दिए जाने की जानकारी देने के लिए अस्पताल और आशा कार्यकत्री के पास काफी वक्त होता है। उसे इस समय में यह जानकारी महिलाओं को दे देनी चाहिए लेकिन इसमें इस पर कोताही बरती गई है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. मिलिंद चंद गर्ग ने बताया है कि यह मामला संज्ञान में आ चुका है। इस मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। कार्रवाई पूरी होते ही सूचना के साथ रिपोर्ट शासन को प्रेषित की जाएगी।
