बाराबंकी: बाइक समेत नहर में समाया पूरा परिवार...महिला का मिला शव, पिता और दो बच्चे अभी भी लापता 

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देवा/बाराबंकी, अमृत विचार। कस्बा देवा में बुधवार की रात हुए दर्दनाक हादसे ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। तिलक समारोह से वापस लौट रहा परिवार बाइक समेत नहर में समा गया। दूसरे दिन जैदपुर की एक नहर में महिला का शव मिलने से इस घटना का खुलासा हुआ। पुलिस और गोताखोर की टीम को सर्च ऑपरेशन के बाद बाइक तो मिल गई, पर पिता और दो बच्चों का अब तक पता नहीं चला है।  

जानकारी के अनुसार, फतेहपुर कोतवाली क्षेत्र के ग्राम गंगौली निवासी पवन कुमार बाइक पर (35) अपनी पत्नी उर्मिला (32), बेटी रागिनी (12) और बेटे अर्पित (8) के साथ लखनऊ के मटियारी क्षेत्र में एक तिलक समारोह से वापस लौट रहे थे। जैसे ही उनकी बाइक देवा चिनहट मार्ग पर बने मामापुर नहर पुल के पास एल-टर्न पर पहुंची, अचानक संतुलन बिगड़ा और पूरी फैमिली बाइक समेत नहर में समा गई। रात का घना अंधेरा होने की वजह से किसी को इस घटना की भनक तक नहीं लग सकी। घटना का खुलासा तब हुआ जब गुरुवार को जैदपुर थाना क्षेत्र के मिर्जापुर गांव के पास शारदा नहर से महिला का शव बरामद हुआ। पुलिस की कोशिश के बाद महिला के शव की शिनाख्त हुई, तब हादसे की खौफनाक सच्चाई सामने आई। बिना देर किए, देवा पुलिस ने सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया। 

पुलिस ने स्थानीय गोताखोरों की मदद से नहर में तलाश कर पवन की बाइक बरामद कर ली, पर पवन और उसके बच्चों रागिनी व अर्पित का कुछ पता नहीं चला। इंस्पेक्टर देवा अजय कुमार त्रिपाठी ने बताया कि बाइक मिलने के बाद यह आशंका गहरा गई है कि पवन और उनके दोनों बच्चे भी नहर में बहते चले गए हैं। तलाश के लिए एसडीआरएफ की टीम को बुलाया गया है, जो घटनास्थल पर सर्च ऑपरेशन चला रही है।  

अरबों खर्च के दावों पर तमाचा मामापुर नहर पुल  
टू लेन, फोर लेन, डिजिटल हाईवे पर अरबों खर्च के दावों को आईना दिखाने के लिए देवा चिनहट मार्ग पर बना मामापुर नहर पुल काफी है। बता दें कि लंबे अरसे से मामापुर नहर पुल के पास न तो कोई बैरिकेटिंग है और न ही चेतावनी संकेत, जिससे यहां अक्सर हादसे होते रहते हैं। जिस स्थान पर यह हादसा हुआ, वहां एल-टर्न है और रात के अंधेरे में दृश्यता बेहद कम हो जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मोड़ पर पूर्व में भी कई वाहन नहर में गिर चुके हैं, लेकिन प्रशासन और संबंधित विभाग ने आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया। हादसे के बाद जिम्मेदार विभाग से लेकर प्रशासन की आंखें खुलती हैं या इसे भी एक हादसा मानकर भुला दिया जाएगा। यह देखने योग्य रहेगा।

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