मुरादाबाद: समाधान दिवस में आने वाली शिकायतों का नहीं हो रहा निस्तारण

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Edited By Amrit Vichar
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मुरादाबाद,अमृत विचार। शासन की प्राथमिकता के बाद भी थानों में होने वाले समाधान दिवस पर आने वाली शिकायतों का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। कभी पुलिस तो कभी राजस्व अफसरों की हीला-हवाली के कारण लंबित शिकायतों की संख्या बढ़ती जा रही है। कुछ मामलों को निपटाने के लिए पुलिस कर्मियों ने एक-दो बार प्रयास …

मुरादाबाद,अमृत विचार। शासन की प्राथमिकता के बाद भी थानों में होने वाले समाधान दिवस पर आने वाली शिकायतों का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। कभी पुलिस तो कभी राजस्व अफसरों की हीला-हवाली के कारण लंबित शिकायतों की संख्या बढ़ती जा रही है। कुछ मामलों को निपटाने के लिए पुलिस कर्मियों ने एक-दो बार प्रयास किए लेकिन बाद में मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया।

थानों के निरीक्षण के दौरान कुछ यही हकीकत सामने आ रही है। थानावार लंबित शिकायतों पर एसएसपी ने नाराजगी जताई है। उन्होंने थानेदारों को अल्टीमेटम दिया है कि अगर समय से शिकायतों का निस्तारण नहीं हुआ तो संबंधित बीट के पुलिस कर्मी पर कार्रवाई की जाएगी।

वर्ष 2008 में शुरू हुआ था समाधान दिवस
अमूमन देखा गया है कि थानों में आने वाले फरियादियों की समस्याओं का निस्तारण नहीं हो पाता है। कभी पुलिस कर्मी हड़काकर भगा देते हैं तो कभी तहरीर लेकर कार्रवाई का आश्वासन दे देते हैं। लिहाजा वर्ष 2008 में शासन ने माह के पहले व तीसरे शनिवार को थानों में समाधान दिवस का आयोजन करने के निर्देश दिए थे, जिसमें पुलिस कर्मियों के साथ ही राजस्व, बिजली व अन्य विभागों की मौजूदगी जरूरी थी, ताकि गंभीर मामलों के साथ ही जमीन संबंधी व अन्य विभागों से संबंधित मामलों का निस्तारण किया जा सके।

शासन के सख्त आदेश थे कि समाधान दिवस का अलग से थानों में रजिस्टर बनाया जाए और शिकायतों का त्वरित निस्तारण किया जाए। इस आदेश के बाद आनन-फानन में थानों में समाधान दिवस का आयोजन शुरू हो गया। खुद डीएम-एसपी भी किसी थाने में जाकर शिकायतों का त्वरित निस्तारण करने के प्रयास करते थे। शुरुआती चरण में शासन का यह प्रयोग काफी सफल भी रहा था।

लाकडाउन में बंद हो गया था समाधान दिवस
वक्त के साथ समाधान दिवस का महत्व भी कम होता चला गया। अक्सर अन्य विभागों के अफसर समाधान दिवस से नदारद होने लगे। जिस कारण समस्याओं के निस्तारण की रफ्तार भी सुस्त हो गई। इधर कोरोना के कारण लगे लाकडाउन के दौरान समाधान दिवस का आयोजन बंद कर दिया गया। करीब चार माह बाद समाधान दिवस का फिर से आयोजन शुरू हो गया। हालांकि अब अफसरों की हीला-हवाली के कारण केवल कागजों पर ही समाधान दिवस का आयोजन हो रहा है। इस मौके पर आने वाली शिकायतों का निस्तारण करने में भी पुलिस कर्मी दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। यही वजह है कि फरियादी फिर भटकने को मजबूर है। इसका खुलासा तब हुआ जब अफसरों ने थानों के निरीक्षण के दौरान रजिस्टर का अवलोकन किया। पूछताछ करने पर पुलिस कर्मी निस्तारण न होने का ठीकरा राजस्व अफसरों के सिर फोड़ने लगते हैं।

समाधान दिवस पर आने वाली शिकायतों का त्वरित निस्तारण करने के निर्देश दिए गए हैं। अगर हीला-हवाली होती है तो संबंधित बीट के पुलिस कर्मी पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। प्रभाकर चौधरी, एसएसपी मुरादाबाद

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