UP : लाइसेंस न कार्रवाई का खौफ, औषधि के नाम पर बेचा जा रहा नशा
पीलीभीत, अमृत विचार। जनपद में खासकर युवाओं में बढ़ती नशे की लत चिंता का विषय बन चुकी है। इसकी रोकथाम और युवाओं को जागरुक करने के लिए तमाम कार्यक्रम आयोजित कर दावे किए जाते हैं। मगर, जमीनी हकीकत कुछ और ही है। नशे के धंधेबाजों ने युवा पीढ़ी को गिरफ्त में ले लिया है। किराना-पान की दुकान हो या गली नुक्कड़..। औषधि का नाम देकर नशे की बिक्री खुलेआम की जा रही है।
लाइसेंस न ही कार्रवाई का खौफ.., पुड़िया में बंद नशे गोली व चूर्ण तराई के युवाओं को नशे की गर्त में ढकेल रहा है। इस पर लंबे समय बाद भी कार्रवाई तो दूर, इसकी जिम्मेदारी कौन सा विभाग उठाएगा, इस पर असमंजस की स्थिति है।
युवा पीढ़ी को नशे की लत से बचाने के लिए शासन-प्रशासन संजीदा है। मेडिकल कॉलेजों में नशा मुक्ति केंद्र खोलने से लेकर स्कूल, कॉलेज समेत अन्य शिक्षण संस्थाओं में जागरुकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। नशा विरोध जागरुकता अभियान भी चलाया जाता है। इन सब प्रयासों के बावजूद नशे के धंधेबाज मुनाफा कमाने की खातिर युवाओं के भविष्य को बर्बाद कर रहे हैं। नेपाल और उत्तराखंड सीमा से सटे तराई के जनपद पीलीभीत की बात करें तो बेहद आसानी से आयुर्वेदिक औषधि के नाम पर नशे की बिक्री लंबे समय से बेरोक टोक चल रही है।
पान के खोखे, चाय की दुकान, किराना दुकान आदि में इनकी बिक्री बड़े पैमाने पर हो रही है। खास बात ये है कि इनके पैकेट पर आयुर्वेद औषधि लिख रखा है। मगर, ये कोई औषधि नहीं बल्कि युवाओं को बर्बाद कर रहा नशा है। जिसका सेवन करके युवा नशे की लत में डूबते जा रहे हैं। इतना ही नहीं नाबालिगों को भी इसकी बिक्री बेखौफ की जा रही है। बेहद आसानी से बेचे जा रहे इस नशे के धंधेबाजों पर शिकंजा कसने की कोई सुध नहीं ले रहा है।
स्कूल- कॉलेजों के आसपास रखे खोखों से भी इनकी बिक्री चल रही है। जिस पर किसी का कोई ध्यान नहीं है। शहरी क्षेत्र में तो बड़े पैमाने पर खाया जा रहा है, ग्रामीण अंचलों में तो हालात और भी बदतर बने हुए हैं। जिम्मेदार इस पर कोई कार्रवाई नहीं कर सके हैं। चार मीनार, गंगा बटी नाम से ये बाजार में बिक रही है। बच्चों के सेवन न करने की चेतावनी भी लिखी हुई है। त्रिकाल नाम से चूर्ण बिक रहा है, जो कि अक्सर युवा पीढ़ी नशा करने के लिए इस्तेमाल कर रही है। इस पर भी आयुर्वेदिक औषधि लिखा है। भांग युक्त होने की जानकारी के साथ ही लौग, आंवला समेत कई चीजों के फोटो भी बने हुए हैं, मानों ये कोई औषधि ही हो।
उन्नाव से आ रही खेप, बीच बाजार से सप्लाई
पान -गुटखा के कारोबार से जुड़े एक व्यापारी की माने तो पीलीभीत में इसकी खेप उन्नाव से पहुंचती हैं। जिसके बाद शहर के मुख्य बाजार के एक व्यस्ततम गली से इसकी सप्लाई चल रही है। गोदाम भी कोतवाली क्षेत्र में होने की बात कही जा रही है। इसके कारोबार की बात करें तो व्यापारी के अनुसार मात्र शहर भर में ही एक माह में 200 बोरे की सप्लाई होती है। एक बोरी में 156 पैकेट होते हैं, एक पैकेट में 40 पाउच यानि प्रतिमाह 12.48 लाख पाउच से अधिक की बिक्री चल रही है। जिसमें अधिकांश युवा वर्ग इस्तेमाल कर रहा है। मुनाफे को लेकर बताया कि एक पैकेट थोक विक्रेता को करीब 23 रुपये के आसपास पड़ता है, जिसकी रिटेल में 30 रुपये में बिक्री होती है। फिर इसे फुटकर में दो से पांच रुपये के बीच बेचकर मुनाफे के नाम पर नशाखोरी का धंधा पनप रहा है।
औषधि लिखा..इसलिए एफएसडीए ने खींचे हाथ
नशे में इस्तेमाल की जा रही आयुर्वेद औषधि लिखे ये चूर्ण और गोली पान, चाय के खोखे और किराना दुकान पर बिक रही हो। दुकानों पर एफएसएसएआई का सर्टिफिकेट भी लगा रखा है। मगर, जिम्मेदारों की मानें तो नशे में इस्तेमाल किए जा रहे ये पैकेट संज्ञान में तो हैं, लेकिन आयुर्वेदिक औषधि लिखा होने के चलते एफएसडीए के दायरे से बाहर चली गई। एफएसडीए के प्रभारी अभिहीत अधिकारी एसके श्रीवास्तव ने बताया कि मामला संज्ञान में है। मगर इन पैकेटों पर आयुर्वेदिक औषधि लिखा होने के कारण विभागीय दायरे से कार्रवाई बाहर है।
आयुर्वेदिक एवं युनानी अधिकारी डॉ. भरत कंचन ने बताया कि इस मामले में कोई जानकारी नहीं है। यदि इस मामले में कोई शिकायत प्राप्त होती है तो चिकित्सकों की टीम बनवाकर सैंपलिंग कराई जाएगी। सैंपल जांच को भेजे जाएंगें, यदि जांच के दौरान इसमें कोई आपत्तिजनक चीज पाई जाती है तो संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
