नया ज्वेलरी ट्रेंड: रोजमर्रा की चमक और लग्जरी लाइफ स्टाइल
इस साल चमकने के लिए तैयार हो जाइए, क्योंकि भारत का ज्वेलरी सीन बड़े, भारी निवेश वाले आभूषणों से आगे बढ़कर पहनने लायक, एक्सप्रेसिव लग्जरी की ओर कदम रख चुका है। आज का उपभोक्ता ऐसे ज्वेलरी पीस चुन रहा है, जो एक्सेसिबल, वर्सेटाइल और पर्सनल हों, जो मॉडर्न लाइफस्टाइल, सस्टेनेबिलिटी और व्यक्तिगत स्टाइल के साथ सहजता से मेल खाएं। इस बदलाव की अगुवाई लैब-ग्रोन हीरे कर रहे हैं, जो किफायती होने के साथ-साथ एथिकल भी हैं और रोजमर्रा की ज़िंदगी में चमक जोड़ते हैं। वहीं सोने, रत्नों और डिज़ाइन में हो रहे इनोवेशन फ्यूजन एस्थेटिक्स, इनक्लूसिविटी और डेली-वियर ज्वेलरी की नई परिभाषा गढ़ रहे हैं- फीचर डेस्क
स्मार्ट लग्ज़री’ की पहचान बनकर उभर रहें लैब ग्रोन हीरे
लैब ग्रोन हीरे (LGDs) भारतीय ज्वेलरी बाज़ार में ‘स्मार्ट लग्ज़री’ की पहचान बनकर उभर रहे हैं। हीरे अब सिर्फ खास मौकों तक सीमित नहीं रह गए, बल्कि रोजमर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बनते जा रहे हैं। खदान से निकले हीरों की तुलना में 60-80 प्रतिशत तक किफायती होने और एक जैसी केमिकल संरचना के कारण, भारतीय उपभोक्ता ऑफिस वियर, गिफ्टिंग और हल्के डेली एक्सेसरीज़ के लिए तेजी से LGDs को अपना रहे हैं।
लैब-ग्रोन हीरों को लेकर पहले जो झिझक थी, वह अब लगभग खत्म हो चुकी है। इस साल भारत न सिर्फ LGDs के प्रोडक्शन, बल्कि खपत का भी एक बड़ा ग्लोबल हब बनने की ओर बढ़ रहा है। ‘आर्टिफिशियल’ होने का पुराना कलंक अब ‘एथिकल लग्ज़री’ की सराहना में बदल चुका है। यह बदलाव मुख्य रूप से मिलेनियल्स और जेन-ज़ी खरीदारों द्वारा संचालित है, जो रीसेल वैल्यू से ज़्यादा साइज, चमक और सस्टेनेबिलिटी को महत्व दे रहे हैं।
हीरे की खपत में बड़े बदलाव
सभी के लिए सॉलिटेयर: कैरेट सॉलिटेयर अंगूठियां और स्टड, जो कभी अल्ट्रा-लग्ज़री माने जाते थे, अब एंट्री-लेवल लग्ज़री खरीद बन चुके हैं।
फैंसी कट्स का उभार: राउंड ब्रिलियंट से आगे बढ़कर ओवल, एमराल्ड और रेडिएंट कट्स ट्रेंड में हैं, जो मॉडर्न लुक के साथ कैरेट वज़न को भी बेहतर तरीके से हाईलाइट करते हैं।
रोजमर्रा की ड्यूरेबिलिटी: बेजल सेटिंग्स और फ्लश माउंट्स जैसे प्रैक्टिकल डिजाइन साड़ियों और ऑफिस वियर के साथ बिना अटकाव के पहने जा सकते हैं।
नियो-हेरिटेज गोल्ड: परंपरा का लाइट अवतार
पारंपरिक टेम्पल ज्वेलरी अब ‘नियो-हेरिटेज’ रूप में लौट रही है- हल्के, खोखले-सोने के डिजाइन जो भारी वजन के बिना बारीक कारीगरी को बनाए रखते हैं। लक्ष्मी सिक्के, मोर और मंदिर प्रेरित मोटिफ्स अब सिर्फ उत्सवों तक सीमित नहीं, बल्कि वर्कप्लेस और कैज़ुअल ब्रंच डेट्स के लिए भी उपयुक्त हो गए हैं।
सोना भारतीय ज्वेलरी की आत्मा बना हुआ है, लेकिन उसका वजन बदल रहा है। सोने की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर होने के चलते 3D कास्टिंग और इलेक्ट्रोफॉर्मिंग जैसी तकनीकों से ऐसे पीस तैयार किए जा रहे हैं, जो देखने में बड़े, लेकिन पहनने में बेहद हल्के हैं।
पेस्टल पोल्की और कुंदन: ब्राइडल ज्वेलरी का सॉफ्ट एरा
इस साल ब्राइडल ज्वेलरी को एक नया, सॉफ्ट मेकओवर मिल रहा है। गहरे लाल और हरे रंगों की जगह अब मिंट, पाउडर ब्लू और ब्लश पिंक जैसे पेस्टल शेड्स ले रहे हैं। ये रंग भारी ब्राइडल सेट्स को शादी के बाद की पार्टियों और फ्यूजन इवेंट्स के लिए भी पहनने लायक बनाते हैं। बिना कटे हीरों के साथ मॉर्गेनाइट, रोज क्वार्ट्ज़ और हल्के रंग के एमराल्ड जैसे सेमी-प्रीशियस स्टोन्स ज्वेलरी को ज्यादा वर्सेटाइल बना रहे हैं।
स्टैक और लेयर: मैक्सिमलिस्ट मिनिमलिज़्म
मिनिमलिज़्म अब ‘मैक्सिमलिस्ट मिनिमलिज़्म’ बन चुका है। महिलाएं मेटल्स, टेक्सचर और लंबाई को मिक्स कर पर्सनल स्टाइल स्टेटमेंट बना रही हैं। मैचिंग सेट्स की जगह अब रिंग स्टैक्स, लेयर्ड नेकलेस और मिक्स्ड-मेटल लुक्स पसंद किए जा रहे हैं।
स्टैकिंग का गोल्डन रूल:
14, 16 और 18 इंच के नेकलेस लेयर्स
पतली बैंड्स के साथ स्टेटमेंट रिंग
टेनिस ब्रेसलेट + बैंगल + स्मार्टवॉच
रत्न डोपामाइन: रंगों की वापसी
पूरी तरह सफ़ेद हीरों से हटकर 2026 में ‘डोपामाइन डेकोर’ ट्रेंड ज्वेलरी में प्रवेश कर चुका है। रूबी, पन्ना, नीलम और स्पिनेल अब सिर्फ एक्सेंट नहीं, बल्कि स्टेटमेंट पीस बन रहे हैं।
ट्रेंडिंग रत्न:
टैन्ज़ानाइट- बैंगनी-नीला, मल्टी-टोन आकर्षण
मॉर्गेनाइट- रोज़ गोल्ड के साथ परफेक्ट ‘मिलेनियल पिंक’
पीला नीलम- आधुनिक कट्स में वापसी
