आसमानी बिजली: प्रकृति की भीषण शक्ति और उसका वैज्ञानिक रहस्य
हमारी धरती के वायुमंडल में जब तीव्र विद्युत आवेश का अचानक डिस्चार्ज होता है, तो उससे उत्पन्न प्रकाश और गड़गड़ाहट को गाज या आसमानी बिजली कहा जाता है। यह एक शक्तिशाली प्राकृतिक घटना है, जो बादलों के भीतर, एक बादल से दूसरे बादल के बीच या बादल और धरती के बीच घटित होती है। विश्व में हर वर्ष लगभग 140 करोड़ बार आसमानी बिजली गिरने की घटनाएँ दर्ज की जाती हैं, जिससे इसकी व्यापकता का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।
आसमानी बिजली की वैज्ञानिक व्याख्या सबसे पहले वैज्ञानिक बेंजामिन फ्रैंकलिन ने अठारहवीं शताब्दी में की थी। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि बिजली चमकना कोई दैवीय चमत्कार नहीं, बल्कि विद्युत ऊर्जा का परिणाम है। जब आकाश में घने बादल बनते हैं, तो उनमें मौजूद पानी की सूक्ष्म बूंदें और बर्फ के कण आपस में टकराते हैं। इस टकराव और हवा की रगड़ से बादलों में विद्युत आवेश उत्पन्न हो जाता है।
परिणामस्वरूप, कुछ बादलों या उनके हिस्सों में पॉजिटिव चार्ज और कुछ में निगेटिव चार्ज जमा हो जाता है। जब विपरीत चार्ज के बीच का अंतर बहुत बढ़ जाता है, तो संतुलन बनाने के लिए अचानक विद्युत प्रवाह होता है, जिसे हम बिजली के रूप में देखते हैं। एक सामान्य आसमानी बिजली में लाखों वोल्ट का वोल्टेज और हजारों एम्पियर का करंट प्रवाहित हो सकता है।
इस दौरान उत्पन्न तापमान लगभग 54 हजार डिग्री फ़ॉरेनहाइट तक पहुँच जाता है, जो सूर्य की सतह से भी कई गुना अधिक होता है। बिजली की गति अत्यंत तीव्र होती है और यह एक क्षण में ही धरती तक पहुँच जाती है। प्रतिदिन औसतन 30 लाख बार बिजली गिरने की घटनाएँ इस तथ्य को रेखांकित करती हैं कि आसमानी बिजली प्रकृति की अद्भुत शक्ति होने के साथ-साथ मानव जीवन के लिए एक गंभीर खतरा भी है।
