डफरिन अस्पताल में चल रही अपनी ही मनमानी... बिना सहमति लगाई जा रही कॉपर-टी, डॉक्टरों पर लगे गंभीर आरोप
लखनऊ, अमृत विचार : डफरिन अस्पताल में रोजाना 20 से 25 सामान्य व सिजेरियन प्रसव कराए जाते हैं। इक्का-दुक्का को छोड़कर लगभग सभी प्रसूताओं को कॉपर-टी लगाई जा रही है। आरोप है कि विरोध करने वाली गर्भवती को दूसरे हॉस्पिटल में डिलीवरी कराने की धमकी दी जाती है। लेबर रूम में अकेली होने के कारण महिलाएं डॉक्टरों का ज्यादा विरोध नहीं कर पातीं। लेबर रूम से बाहर आने के बाद जब कुछ महिलाएं अपने परिवार वालों को इस बारे में बताती हैं तो परिवारीजन विरोध दर्ज कराते हैं, अस्पताल प्रशासन इस विरोध को गंभीरता से नहीं ले रहा है।
केस-1 : खदरा निवासी मो. इस्माइल की पत्नी सोनी को प्रसव पीड़ा होने पर वीरांगना अवंतीबाई महिला चिकित्सालय (डफरिन) में भर्ती कराया गया। पति के मुताबिक 12 सितंबर को सिजेरियन प्रसव से जुड़वा बच्चों का जन्म हुआ। प्रसव से पहले डॉक्टर ने फाइल पर साइन कराए थे। इस दौरान कॉपर-टी लगवाने का भी सहमति पत्र दिया गया, जिसे पर साइन करने से इस्माइल ने मना कर दिया। आरोप है कि डॉक्टर ने क्वीनमेरी रेफर की की धमकी दी और दबाव बनाया कि साइन कर दो कॉपर-टी नहीं लगाई जाएगी। डिलीवरी के करीब एक माह बाद तक ब्लीडिंग नहीं रुकी। पेशाब के रास्ते से पस आने लगा। निजी अस्पताल में दिखाने पर कॉपर-टी लगी होने की जानकारी हुई। जांच में पता चला कॉपर-टी के कारण संक्रमण फैल गया। मामले की शिकायत अस्पताल प्रशासन से की गई है।
केस-2 : नजीराबाद की शाइस्ता की डिलीवरी भी डफरिन अस्पताल में 23 मई 2024 को हुई थी। पति अरमान ने बताया डॉक्टर ने प्रसव से पहले कॉपर-टी के लिए सहमति पत्र साइन करने को कहा। इनकार करने पर ऑपरेशन न करने की बात कही गई। बताया गया कि सरकारी अस्पताल में प्रसव कराना है तो कॉपर-टी लगवानी पड़ेगी। प्रसव के बाद आप निजी अस्पताल जाकर महज 100-150 के खर्च पर इसे निकलवा देना। मजबूर होकर अरमान को साइन करना पड़ा। अरमान का कहना है अब दोबारा से डिलीवरी की तारीख मिली है, लेकिन वह डफरिन में डिलीवरी कराने से डर रहे हैं।
लेबर रूम में बदसलूकी का भी आरोप
आरोप है कि लेबर रूम के अंदर महिलाओं को प्रसव पीड़ा के असहनीय दर्द के साथ-साथ डॉक्टरों और बाकी स्टाफ की बदसलूकी भी झेलनी पड़ती है। खासकर नाइट ड्यूटी के दौरान डॉक्टरों को गर्भवती महिलाएं आफत नजर आती हैं। यहां डिलिवरी के लिए आईं महिलाओं ने बताया कि डॉक्टर महिलाओं पर चीखती-चिल्लाती हैं। परिवार नियोजन के संसाधन अपनाने के लिए विवश करती हैं।
अस्पताल प्रशासन का दावा बिना सहमति के नहीं लगाईं जाती कॉपर-टी
अस्पताल की प्रमुख अधीक्षिका डॉ. ज्योति मेहरोत्रा ने बताया कि हमारे चार्ज लेने से पहले ऐसे कुछ केस सामने आए थे, जिन्हें संज्ञान में लेकर कार्रवाई करने के साथ ही सुधार भी कराया गया। उन्होंने दलील दी कि कॉपर-टी लगाने से पहले महिला को फैमिली प्लानिंग की अहमियत समझाई जाती है। महिला की सहमति के बाद ही कॉपर-टी लगाई जाती है। लेबर रूम में डॉक्टर किस तरह काउंसिलिंग करती हैं, इसकी जानकारी नहीं है। इस मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
