माघ मेले में प्रयाग की पंचकोसी परिक्रमा का शुभारंभ, त्रिवेणी तट पर पूजन के साथ शुरू हुई 5 दिवसीय सनातन परंपरा 

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Published By Anjali Singh
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लखनऊ/प्रयागराज, अमृत विचार: माघ मेले के पावन अवसर पर प्रयाग की सनातन परंपरा, आस्था और सांस्कृतिक चेतना की प्रतीक पंचकोसी परिक्रमा का विधिवत शुभारंभ हो गया। त्रिवेणी संगम के तट पर गंगा पूजन के साथ सोमवार को पांच दिवसीय पंचकोसी परिक्रमा की शुरुआत हुई। परिक्रमा का नेतृत्व अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के प्रमुख संतों व प्रतिनिधियों ने किया।

संगम में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गंगा पूजन के बाद साधु–संतों का जत्था अक्षयवट और आदि शंकर विमान मंडपम मंदिर के दर्शन के लिए रवाना हुआ। इसके साथ ही पंचकोसी परिक्रमा के पहले दिन का विधिवत समापन हुआ। माघ मेला प्रशासन को परिक्रमा मार्ग पर यातायात और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पांच दिनों तक चलने वाली इस परिक्रमा के अंतिम दिन साधु–संतों के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा।

अकबर ने रोकी थी परंपरा, योगी ने कराया शुरू

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी ने बताया कि लगभग 556 वर्ष पूर्व मुगल शासक अकबर के शासनकाल में इस परंपरा पर रोक लगा दी गई थी। लंबे समय तक बंद रहने के बाद साधु–संतों की निरंतर मांग और प्रयासों के फलस्वरूप योगी सरकार ने वर्ष 2019 में पंचकोसी परिक्रमा को पुनर्जीवित किया। तब से यह परंपरा सतत रूप से चली आ रही है।

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