KGMU News: अब स्तन कैंसर की चंद घंटों में हो सकेगी पहचान, केजीएमयू को मिला वियरेबल डिवाइस का पेटेंट
लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के संयुक्त बायोडिज़ाइन कार्यक्रम स्कूल ऑफ इंटरनेशनल बायोडिज़ाइन - सिंर्ज़ाइजिंग हेल्थकेयर इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप (एसआईबी शाइन) को चिकित्सा नवाचार के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता मिली है।
एसआईबी शाइन को "स्तन असामान्यता की निगरानी के लिए वियरेबल सेंसर पैच" नामक अत्याधुनिक मेडिकल डिवाइस के लिए पेटेंट प्रदान किया गया है। यह उपकरण महिलाओं के स्तन स्वास्थ्य की प्रारंभिक पहचान और लगातार निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह वियरेबल सेंसर पैच एक हल्का, सुरक्षित और गैर-आक्रामक उपकरण है, जिसे स्तन पर कुछ घंटों तक आसानी से लगाया जा सकता है।
इसे सामान्य अंतर्वस्त्रों के नीचे आराम से पहना जा सकता है, जिससे महिलाओं की दिनचर्या प्रभावित नहीं होती। यह डिवाइस स्तन में होने वाले असामान्य बदलावों की निरंतर निगरानी कर सकती है, जिससे समय रहते बीमारी की पहचान और उपचार संभव हो सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक विशेष रूप से स्तन कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की प्रारंभिक जांच में उपयोगी सिद्ध हो सकती है। इस अभिनव डिवाइस की परिकल्पना एसआईबी शाइन के पहले फेलोशिप बैच के दौरान क्लिनिकल इमर्शन चरण में की गई थी।
केजीएमयू के एंडोक्राइन सर्जरी विभाग की डॉ. पूजा रामाकांत के मार्गदर्शन में एसआईबी शाइन फेलो श्रेया नायर ने इस अधूरी चिकित्सीय आवश्यकता को पहचाना। इसके बाद आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर डॉ. तुषार संधान के इंजीनियरिंग मार्गदर्शन में इस विचार को एक कार्यशील प्रोटोटाइप का रूप दिया गया। श्रेया नायर माइक्रोबायोलॉजी पृष्ठभूमि से हैं और उन्होंने महिलाओं के स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्यरत स्टार्टअप ब्रेला इनोवेशंस की भी स्थापना की है।
एसआईबी शाइन के कार्यकारी निदेशक डॉ. ऋषि सेठी ने कहा कि इस संस्थान की स्थापना का उद्देश्य चिकित्सकों और इंजीनियरों को एक मंच पर लाकर रोगी-केंद्रित और व्यावहारिक समाधान विकसित करना है। यह पेटेंट केजीएमयू और आईआईटी कानपुर के बीच मजबूत सहयोग और नवाचार की सफलता को दर्शाता है। केजीएमयू की कुलपति प्रो. डॉ. सोनिया नित्यानंद ने इस उपलब्धि पर एसआईबी शाइन टीम और नवप्रवर्तकों को बधाई देते हुए इसे स्वदेशी चिकित्सा उपकरण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
गौरतलब है कि एसआईबी शाइन, किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर का संयुक्त कार्यक्रम है, जिसे वर्ष 2022 में भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के मार्गदर्शन में शुरू किया गया था। अब तक यह कार्यक्रम दो फेलोशिप बैच पूरे कर चुका है और चार मेडटेक स्टार्टअप्स को जन्म दे चुका है। एसआईबी शाइन के वरिष्ठ कार्यक्रम प्रबंधक सुमित कुमार वैष ने बताया कि जल्द ही तीसरे बैच के लिए आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे।
