एनसीएलएटी ने एलडीए का पक्ष माना: बिना सुने पारित नहीं होगा आदेश, होम बायर्स धोखाधड़ी में अंसल ग्रुप दिवालिया का आदेश बरकरार 

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Published By Anjali Singh
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लखनऊ, अमृत विचार : लखनऊ में हाईटेक टाउनशिप नीति के विपरीत कार्य करते हुए होम बायर्स के साथ धोखाधड़ी करने वाले अंसल ग्रुप के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ अपीलीय ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) दिल्ली में बुधवार को अहम फैसला सुनाया है। अपीलीय ट्रिब्यूनल ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) का पक्ष स्वीकार करते हुए नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) को निर्देश दिये कि इस प्रकरण में बिना सुने कोई भी आदेश पारित नहीं किया जाएगा।

एनसीएलटी ने अंसल ग्रुप को दिवालिया घोषित करते हुए इंट्रिम रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (आईआरपी) नियुक्त किया है। इससे अंसल की परियोजनाओं में भूखंड, फ्लैट, विला व व्यावसायिक सम्पत्तियों में निवेश करने वाले हजारों निवेशकों की पूंजी फंसी है। कई ऐसे आवंटी हैं, जिन्हें कंपनी ने वर्ष 2009 में भूखंड बेचे, लेकिन अब तक कब्जा नहीं दिया गया। इस पर एनसीएलटी ने अंसल को दिवालिया घोषित करने का फैसला सुनाते समय एलडीए, आवास विभाग समेत किसी भी शासकीय विभाग को न तो कोई नोटिस दी और न ही पक्ष सुना।

इससे अंसल पर शासकीय विभागों की देयता के साथ ही होम बायर्स का हित भी फंस गया। इस प्रकरण पर मुख्यमंत्री ने पीड़ित होम बायर्स के हितों का संज्ञान लेते हुए अंसल ग्रुप के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिये थे। इसके अनुपालन में एलडीए ने अंसल ग्रुप के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के साथ फैसले के खिलाफ एनसीएलएटी में प्रभावी पैरवी की। इससे एनसीएलएटी को प्राधिकरण का पक्ष मानना पड़ा। अब एनसीएलएटी के आदेशों के तहत एनसीएलटी को एलडीए का पक्ष सुनना पड़ेगा और बिना सुनवाई के कोई भी आदेश पारित नहीं होगा।

बेची थी बंधक 411 एकड़ जमीन, 4500 करोड़ की देयता का दावा

अंसल प्रॉपर्टीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड द्वारा हाईटेक टाउनशिप नीति के अनुसार योजना पूर्ण करने के लिए परफार्मेंस गांरटी के रूप में एलडीए के पक्ष में 411 एकड़ भूमि बंधक रखी है। जांच में सामने आया है कि अंसल ने अनाधिकृत तरीके से बंधक भूमि बेच दी। इस मामले में एलडीए ने एनसीएलटी में अंसल ग्रुप पर 4500 करोड़ रुपये की देयता का दावा भी प्रस्तुत किया है। इसमें अर्जन, मानचित्र आदि का शुल्क शामिल है।

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