दुनिया में आयुर्वेद उत्पादों की विश्वसनीयता बढ़ाएगा CSIR-सीमैप, जांच को तैयार किए 14 भारतीय निर्देशक दृव्य
मार्कण्डेय पाण्डेय/ लखनऊ, अमृत विचार: भारतीय आयुर्वेदिक उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक मानकों पर खरा साबित करने के लिए सीएसआईआर-सीमैप ने शोध और विकास का कार्य शुरू कर दिए हैं। इसी दिशा में हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुरूप आयुर्वेदिक उत्पादों की जांच के लिए 14 भारतीय निर्देशक दृव्य तैयार किए हैं। संस्थान अगले एक वर्ष में 100 और उसके बाद 1100 निर्देशक द्रव्यों का निर्माण करेगा। भारतीय वनस्पतियों से तैयार दवाओं की गुणवत्ता विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुरूप होने से इनका निर्यात बढेगा। आयुष मंत्रालय के सूची के अनुसार देश में करीब 8 हजार प्रकार की वनस्पतियों से दवाएं व अन्य हर्बल उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इनके मूल्यांकन के लिए 1100 से अधिक निर्देशक दृव्यों की जरूरत है।
क्या होता निर्देशक द्रव्य
सीएसआईआर-सीमैप के वैज्ञानिक डॉ. करुण शंकर ने बताया कि जैसे दूध की गुणवत्ता जांचने के लिए वसा (फैट), चीनी के लिए सैकरीन और कॉफी में कैफीन या तंबाकू में निकोटीन चेक किया जाता है, वैसे ही वनस्पतियों का निर्देशक द्रव्य होता है। इससे वनस्पतियों की गुणवत्ता का वैज्ञानिक आधार पर मापन किया जाता है।
इस तरह बढ़ेगा विदेशी निर्यात
आयुर्वेदिक वनस्पतियों के बारे में भारतीय ग्रंथों में वर्णन किया गया है। जिनका वैज्ञानिक आधार न होने से विदेशों में इसे कम स्वीकार किया जा रहा था। इसके अलावा विदेशी सरकारों द्वारा भी इसे स्वीकार नहीं किया जा रहा था। अब भारत सरकार के केंद्रीय आयुर्वेदिक अनुसंधान परिषद (सीसीआरए) के द्वारा इन उत्पादों को वैज्ञानिक आधार पर प्रमाणित किया जाने लगा है। निर्देशक तत्व से पूरी तरह स्वदेशी किंतु अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार पद्धति से इसे साबित किया जाने लगा है।
