सदमे में वेदांता ग्रुप अनिल अग्रवाल के चेयरमैन, जानिए बिहार से निकले अनिल अग्रवाल कैसे बने अरबपति

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Published By Deepak Mishra
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नई दिल्ली। 7 जनवरी 2026 को वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश अग्रवाल का अमेरिका में निधन हो गया। 49 वर्षीय अग्निवेश की मौत एक स्कीइंग हादसे के बाद कार्डियक अरेस्ट से हुई। इस खबर ने परिवार और उद्योग जगत को गहरा सदमा पहुंचाया। अनिल अग्रवाल ने इसे अपने जीवन का "सबसे अंधेरा दिन" बताया था। 

वेदांता ग्रुप के संस्थापक और चेयरमैन अनिल अग्रवाल, एक छोटे व्यवसाय से उठकर अरबों डॉलर की वैश्विक प्राकृतिक संसाधन और धातु कंपनी के प्रमुख बने हैं। उनके नेतृत्व में वेदांता ने खनन, तेल-गैस, धातु और बिजली जैसे विविध क्षेत्रों में विस्तार किया है। अनिल अग्रवाल नाम नाम प्रभावशाली उद्योगपतियों में शुमार है। 

अनिल अग्रवाल का जन्म 24 जनवरी 1954 को पटना (बिहार) के एक मारवाड़ी परिवार में हुआ था। उनके पिता द्वारकाप्रसाद अग्रवाल का एक छोटा एल्यूमीनियम कंडक्टर (aluminum conductor) बनाने का बिजनेस था, जिसमें अनिल ने अपने प्रारंभिक समय में मदद की और इसी से उनके व्‍यवसायिक सपनों की नींव पड़ी। इसी व्यवसाय से सीख लेकर अनिल अग्रवाल ने बाद में मुंबई में स्क्रैप डीलर के तौर पर काम शुरू किया और अपनी धातु (मेटल) की दुनिया की नींव रखी। 

अनिल अग्रवाल की पत्‍नी और बच्‍चे अनिल अग्रवाल के व्यक्तिगत जीवन में पत्नी किरण अग्रवाल का महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने न केवल पारिवारिक मोर्चे पर सहयोग दिया, बल्कि वेदांता समूह की सामाजिक पहलों में भी सक्रिय भूमिका निभाई है। अनिल अग्रवाल के दो बच्चे थे जिसमें पुत्र अग्निवेश अग्रवाल जिनकी दुखद मौत हो गई और पुत्री एक बेटी प्रिया अग्रवाल हेब्बर है।

7 जनवरी 2026 को अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश अग्रवाल जिनका निधन हो गया वो अग्निवेश अग्रवाल स्वयं एक सफल व्यवसायी थे। उन्होंने फुजैरा गोल्ड की स्थापना की और हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के अध्यक्ष भी रहे। उन्हें मीडिया में एक सरल, मिलनसार और सशक्त नेतृत्व गुणों वाले व्यक्ति के रूप में याद किया जाता है। 

वहीं बेटी प्रिया अग्रवाल हेब्बर वेदांता ग्रुप की बोर्ड सदस्य और हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की चेयरपर्सन हैं। वे सामाजिक और एनिमल वेलफेयर कार्यों में सक्रिय हैं। प्रिया का विवाह बैंकर आकर्ष हेब्बर से हुआ है, और उनकी बेटी माही, अनिल अग्रवाल की पोती हैं, जिन्हें वह अपनी "सबसे बड़ी खुशी" बताते हैं। 

अनिल अग्रवाल का अरबपति बिजनसेनमैन बनने का सफर 
  • अनिल अग्रवाल ने अपना बिजनेस सफर 1970 के मध्य (1975-76) में शुरू किया। 
  • शुरुआती दौर में उन्होंने scrap मेटल (खराब/पुराना धातु) इकट्ठा कर मुंबई में बेचने का काम किया। 
  • इसी छोटे ट्रेड से हुई कमाई ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी। 
  • 1976 में अनिल अग्रवाल ने बैंक लोन के ज़रिये Shamsher Sterling Corporation खरीदी। 
  • यह कंपनी कॉपर और केबल उत्पाद बनाने का काम करती थी। 
  • 1986 में उन्होंने Sterlite Industries की स्थापना की। 
  • यह फैक्ट्री jelly-filled cables बनाती थी। 
  • कच्चे माल (कॉपर, एल्यूमिनियम) की कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचने के लिए उन्होंने खुद धातु निर्माण की रणनीति अपनाई। 
  • इसी रणनीति के तहत 1993 में Sterlite Industries ने भारत का पहला प्राइवेट कॉपर स्मेल्टर और रिफ़ाइनरी स्थापित किया। 
  • 2000 के दशक की शुरुआत में अनिल अग्रवाल ने सरकारी विनिवेश (Disinvestment) के तहत बड़े अधिग्रहण किए। 
  • 2001 में BALCO (भारत एल्युमिनियम कंपनी) में बड़ी हिस्सेदारी खरीदी। 
  • 2002 में Hindustan Zinc Limited का अधिग्रहण किया। 
  • इससे खनन और धातु क्षेत्र में उनकी पकड़ और मजबूत हुई। 
  • 2003 में उन्होंने Vedanta Resources Plc को लंदन में incorporate और list किया।
  • इससे वेदांता को अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजारों तक सीधी पहुंच मिली। 
  • आज Vedanta एक वैश्विक प्राकृतिक संसाधन समूह है। 
  • ग्रुप का कारोबार जिंक, तांबा, सोना, लौह अयस्क, तेल-गैस, पावर और अन्य खनिजों में फैला है।
  • वर्तमान में अनिल अग्रवाल Vedanta Group की वैश्विक नेतृत्व टीम के चेयरमैन हैं। 
  • Vedanta का मुख्य बिजनेस ऑपरेशन भारत, अफ्रीका और अन्य देशों में फैला हुआ है।
  • भारत में कंपनी की प्रमुख गतिविधियाँ मुंबई, ओडिशा, राजस्थान, गोवा और गुजरात में संचालित हैं। 

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