Pakistan-Afghanistan Clash: तालिबान के लगातार हमलों से पाकिस्तान में मचा हाहाकार, 40 से अधिक सैनिकों की मौत का दावा

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
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काबुलः पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा विवाद अब खुली जंग में बदल चुका है। हाल के दिनों में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर लगातार हमले तेज कर दिए हैं, जिसमें क्रॉस-बॉर्डर फायरिंग, मोर्टार हमले और हवाई स्ट्राइक्स शामिल हैं। अफगान तालिबान ने दावा किया है कि उन्होंने पाकिस्तान के बाजौर, खैबर और अन्य जिलों में स्थित कई सैन्य चौकियों पर हमला किया, जिसमें दर्जनों पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और कुछ चौकियां कब्जे में ली गईं। हालांकि, पाकिस्तान ने इन दावों को खारिज करते हुए जवाबी कार्रवाई में अफगानिस्तान के काबुल, कंधार और पक्तिया जैसे प्रमुख शहरों पर हवाई हमले किए, जिन्हें 'ऑपरेशन घज़ब लिल हक' नाम दिया गया है।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने इसे "ओपन वॉर" करार देते हुए कहा कि अफगान तालिबान द्वारा टीटीपी (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) जैसे उग्रवादी समूहों को शरण देने और पाकिस्तान में हमले करवाने की नीति अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि उनके हमलों में सैकड़ों तालिबान लड़ाके मारे गए, जबकि अफगान पक्ष ने नागरिकों की मौत का आरोप लगाया है।

बाजौर जिले में तीव्र गोलीबारी और मोर्टार हमलों की खबरें आई हैं, जहां अफगान तालिबान ने पाकिस्तानी सीमा चौकियों को निशाना बनाया। पाकिस्तान ने इन हमलों को "बिना उकसावे" का बताया और तुरंत जवाब दिया। अफगान रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि उनके हमलों में पाकिस्तानी सैनिकों को भारी नुकसान हुआ, लेकिन स्वतंत्र स्रोतों से इन आंकड़ों की पुष्टि नहीं हो पाई है। दोनों पक्ष अलग-अलग मौतों के आंकड़े जारी कर रहे हैं, जिसमें अफगानिस्तान 40-55 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत का दावा करता है, जबकि पाकिस्तान सैकड़ों तालिबान लड़ाकों के मारे जाने की बात कहता है।

इसके अलावा, अफगान तालिबान ने ड्रोन हमलों का भी दावा किया है, जिनमें पाकिस्तान के नौशेरा, एबटाबाद और अन्य सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। पाकिस्तान ने इन ड्रोनों को मार गिराने का दावा किया है और कहा है कि कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। कुछ रिपोर्टों में इस्लामाबाद के आसपास धमाकों और आग की लपटों की बात कही गई, लेकिन पाकिस्तानी अधिकारियों ने इसे सीमित और असफल प्रयास बताया।

क्षेत्रीय स्थिरता पर चिंता बढ़ी है, और सऌदी अरब जैसे देशों ने हस्तक्षेप किया है। अफगान विदेश मंत्री मौलवी अमीर खान मुत्तकी ने सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान से फोन पर बात की, जिसमें दोनों ने तनाव कम करने, संवाद बढ़ाने और राजनयिक रास्ते अपनाने पर जोर दिया। अफगान पक्ष ने खुद को रक्षात्मक बताते हुए कहा कि वे किसी के खिलाफ आक्रामक नहीं हैं, बल्कि अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं।

तालिबान ने अपने अभियानों को "रेड अल-जुल्म" (जुल्म के खिलाफ जवाबी कार्रवाई) नाम दिया है, जबकि पाकिस्तान इसे आतंकवाद के खिलाफ जरूरी कदम बता रहा है। दोनों देशों के बीच दुर्दांत लाइन (ड्यूरंड लाइन) पर तनाव लंबे समय से चला आ रहा है, लेकिन हालिया घटनाएं इसे सबसे गंभीर स्तर पर ले गई हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय, जिसमें संयुक्त राष्ट्र भी शामिल है, ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की अपील की है।

यह संघर्ष दक्षिण एशिया की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है, क्योंकि दोनों परमाणु शक्ति संपन्न क्षेत्रों से जुड़े हैं। फिलहाल, सीमा पर गोलीबारी और जवाबी हमले जारी हैं, और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

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