बाराबंकी में अवैध अस्पतालों का जाल मजबूत: हवा में सरकारी आंकड़े, सवालों के घेरे में इलाज की गुणवत्ता  

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
On

बाराबंकी, अमृत विचार। जिला मुख्यालय स्थित कार्यालय से बैठकर स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी आमजन पर भारी पड़ रही है। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की बात कौन करे, निजी क्षेत्र में लूट खसोट पर ही विभाग का कोई नियंत्रण नहीं रह गया है। आए दिन वैध अवैध निजी अस्पताल, क्लीनिक पर मरीजों की मौतें उस पर पर्दा डालने की कोशिश इनके हौसलों को पंख देने का काम कर रही है। 

बाराबंकी जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था गंभीर सवालों के घेरे में है। सरकारी रिकॉर्ड में भले ही कुछ सैकड़ा अस्पताल, क्लीनिक और पैथालॉजी पंजीकृत हों, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कहीं ज्यादा भयावह है। जिले में डेढ़ हजार से अधिक अस्पताल और नर्सिंग होम धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं, वहीं इनमें अधिकांश पूरी तरह अवैध हैं। तहसील और कस्बे में बिना मानक, निगरानी और जवाबदेही के यह अवैध अस्पताल मरीजों का इलाज करने के नाम पर केवल जेब ढीली कर रहे, उस पर मरीज की जान पर खतरा अलग से है। 

मर्ज की पहचान किए बिना ही इलाज का ठेका लेने की परिपाटी में ही कई मरीजों की जान तक जा चुकी। इनकी जांच कमेटी बिठाकर शुरु कराई गई पर नतीजा ढाक के तीन पात। आरोपित अस्पताल व क्लीनिक बदस्तूर संचालित हैं। केवल दिसंबर माह में तीन मरीजों की मौत गलत इलाज से हुई पर ठोस कार्रवाई होती कहीं नहीं दिखी। पंजीकृत ही नहीं गैर पंजीकृत अस्पताल, क्लीनिक अपने नेटवर्क व दलालों के सहारे मरीज जुटाते हैं फिर उनका दोहन किया जाता है। इस गोरखधंधे से विभाग अंजान नहीं बस सारा खेल मिलीभगत का ही है। 

हकीकत से कहीं दूर हैं सरकारी आंकड़े

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में कुल 318 निजी अस्पताल, 44 क्लीनिक और 84 पैथालाजी संचालित हैं। जबकि हकीकत इससे कहीं परे है। जिले भर में डेढ़ हजार से अधिक वैध अवैध अस्पताल, क्लीनिक चल रहे, वहीं झोलाछाप डाक्टरों की संख्या तो असंख्य है। कई जगह हालात यह हैं कि जिन डॉक्टरों के नाम पर अस्पताल पंजीकृत हैं, वे महीनों तक वहां दिखाई ही नहीं देते।

अस्पतालों का संचालन अप्रशिक्षित कर्मचारियों के भरोसे छोड़ा गया है, जिससे मरीजों की सुरक्षा और इलाज की गुणवत्ता पर गंभीर खतरा बना हुआ है। शहर से दूरी अधिक होने के कारण ग्रामीण इलाकों के लोग मजबूरी में इन्हीं अस्पतालों का रुख करते हैं। यही हाल अन्य तहसीलों का भी है, जहां अवैध अस्पताल बेखौफ होकर अपनी दुकानें चला रहे हैं। नियमित जांच और सख्त कार्रवाई के अभाव में अवैध अस्पतालों का नेटवर्क लगातार बढ़ रहा है।

समय समय पर होती है कार्रवाई

अवैध अस्पताल, क्लीनिक व पैथालाजी के बारे में बात किए जाने पर प्रभारी पंजीकरण डा. एलबी गुप्ता ने बताया कि अवैध रूप से संचालित अस्पताल व क्लीनिक के अलावा झोलाछाप डाक्टरों पर कार्रवाई समय समय पर की जाती रही है। विभाग इनके संचालन पर निगरानी बनाए हुए है। शिकायत मिलते ही एक्शन लिया जा रहा।

ये भी पढ़ें : 
बाराबंकी में SIR प्रशिक्षण सम्पन्न, DM ने कहा-कोई भी न छूटे, सूची में न रहे अपात्र मतदाता 

संबंधित समाचार