Moradabad: गर्भाशय की टीबी बन रही मातृत्व में बाधा, 25 से 40 वर्ष की महिलाएं ज्यादा प्रभावित
मुरादाबाद, अमृत विचार। महिलाओं में फैलने वाली गर्भाशय की टीबी (जेनिटल टीबी) मातृत्व के लिए एक गंभीर खतरे के रूप में सामने आ रही है। खासतौर पर 25 से 40 वर्ष की उम्र की महिलाओं में इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। चिंता की बात यह है कि इस बीमारी के शुरुआती लक्षण सामान्य और हल्के होने के कारण अधिकांश महिलाएं इसे नजरअंदाज कर देती हैं। नतीजतन, समय रहते इलाज न मिलने से आगे चलकर गर्भधारण में गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
इस संबंध में जिला महिला अस्पताल की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. सुजाता ने बताया कि यदि शादी के कई वर्षों बाद भी महिला गर्भधारण नहीं कर पा रही है, तो इसे सामान्य समस्या मानकर टालना नहीं चाहिए। बांझपन के पीछे गर्भाशय की टीबी एक बड़ी वजह हो सकती है। यह बीमारी ट्यूबरकुलोसिस बैक्टीरिया के कारण होती है, जो धीरे-धीरे गर्भाशय, फैलोपियन ट्यूब और अन्य जननांगों को प्रभावित करता है।
डॉ. सुजाता के अनुसार, अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन तीन से चार महिलाएं ऐसी पहुंच रही हैं, जिनमें शुरुआती स्तर पर गर्भाशय की टीबी के लक्षण पाए जा रहे हैं। कई मामलों में महिलाएं लंबे समय तक इलाज के लिए नहीं आतीं, जिससे बीमारी गंभीर रूप ले लेती है और मां बनने की संभावना कम हो जाती है। उन्होंने बताया कि गर्भाशय की टीबी को खामोश बीमारी भी कहा जाता है, क्योंकि यह बिना स्पष्ट लक्षणों के शरीर में धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाती रहती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि समय रहते जांच कर ली जाए और पूरा इलाज कराया जाए तो महिला पूरी तरह स्वस्थ होकर मातृत्व सुख प्राप्त कर सकती है। इसके लिए धैर्य के साथ डॉक्टर की सलाह पर नियमित दवाएं लेना जरूरी है।
हल्का लेकिन लंबे समय तक रहने वाला बुखार
डॉ. सुजाता ने महिलाओं से अपील की कि वे अपने शरीर में होने वाले किसी भी असामान्य बदलाव को हल्के में न लें। संदेह होने पर तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क करें, ताकि समय पर जांच और इलाज से मातृत्व की राह आसान बनाई जा सके।
ये हैं प्रमुख लक्षण
- अधिक पसीना आना
- लगातार थकान महसूस होना
- पेट के निचले हिस्से में दर्द
- अनियमित रक्तस्त्राव
- वजन का तेजी से कम होना
