पर्यावरण के लिए 'Reduce, reuse और recycle' का सिद्धांत अपनाएं, BBAU में विश्वविद्यालय स्थापना दिवस पर हुआ मंथन

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
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लखनऊ, अमृत विचार: बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय की स्थापना के 30 वर्ष पूर्ण होने पर चल रहे तीन दिवसीय कार्यक्रम के दूसरे दिन ''विकसित भारत के संकल्प की सिद्धि हेतु सामाजिक परिवर्तन का आह्वान'' विषय पर मंथन हुआ। कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने युवाओं से कहा कि एन्वॉयरमेंटल लीडर की भूमिका निभाते हुए अल्पकालिक पाठ्यक्रमों के माध्यम से स्वयं को सशक्त बनाएं और पर्यावरण संरक्षण के लिए ‘रिड्यूस, रीयूज और रीसायकल’ के सिद्धांत को अपनाकर कार्य करें।

हिन्दी संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. सदानन्द प्रसाद गुप्त ने ''विकसित भारत के संकल्प की सिद्धि हेतु कहा कि स्वबोध का सीधा संबंध भाषा-बोध से जुड़ा होता है और हमें अपनी भाषा पर गर्व करना चाहिए। उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा ने स्वदेशी एवं स्वबोध की भूमिका पर अपने विचार रखा। अम्बेडकर फाउंडेशन के डॉ. चमन लाल बंगा ने कहा कि आवश्यक है कि राष्ट्र सांस्कृतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी सशक्त बने। विश्वविद्यालय दिवस के तीसरे दिन स्वदेशी संकल्प दौड़ का आयोजन होगा। इसका उद्घाटन उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक एवं विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल करेंगे। कार्यक्रम में प्रो. राम चंद्रा, संजय श्रीहर्ष, प्रो. ध्रुव सेन सिंह, प्रो. राजशरण शाही, प्रो. हरिशंकर सिंह उपस्थित रहे।

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