बाराबंकी में आग की भेंट चढ़े 10 गोवंश 40 बकरियां, पशुपालक भी झुलसा
बाराबंकी, अमृत विचार। पशुपालन कर परिवार का पालन पोषण करने वाले व्यक्ति पर रविवार रात बहुत भारी गुजरी। छप्पर में लगी आग ने विकराल रूप धारण कर सात गायों, तीन बछड़े और करीब 40 बकरियों को जिन्दा जला डाला। इन्हे बचाने के प्रयास में पशुपालक भी गंभीर रूप से झुलस गया। हादसे की भयावहता देख ग्रामीण कांप उठे। वहीं पीड़ित का परिवार सदमे में है।
जानकारी के अनुसार जहांगीराबाद थाना क्षेत्र के ग्राम फतेहसरांय में रेलवे लाइन किनारे रहने वाले फूलचंद्र चौहान रोज की तरह रविवार रात भी अपने पशुओं को चारा-पानी देकर छप्पर के नीचे ही सो गए थे, जबकि उनकी पत्नी शकुंतला पास के एक अन्य छप्पर में लेटी थीं। रात करीब साढ़े ग्यारह बजे अचानक छप्पर में आग लग गई। लपटें उठती देख फूलचंद्र ने शोर मचाया और बिना अपनी जान की परवाह किए बंधे पशुओं को खोलने लगे।
इसी दौरान आग में घिर कर फूलचंद्र भी गंभीर रूप से झुलस गया। फूलचंद्र के पुत्र मथुरा प्रसाद ने बताया कि उनके पिता वर्षों से गाय और बकरियां पालकर दूध बेचकर परिवार का भरण-पोषण करते थे। आग इतनी तेजी से फैली कि आसपास के लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही अधिकांश मवेशी जलकर दम तोड़ चुके थे। शोर सुनकर मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने दमकल विभाग को सूचना दी, लेकिन तब तक भारी नुकसान हो चुका था।
करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। गांव पहुंचे सदर तहसीलदार ने नुकसान के आंकलन के निर्देश हल्का लेखपाल को दिए। साथ ही पशु चिकित्सा अधिकारियों को घायल पशुओं के उपचार के आदेश दिए गए।
सोमवार सुबह जिला पशु चिकित्सा अधिकारी की टीम ने मृत मवेशियों का पोस्टमार्टम कराकर उन्हें दफन कराया। घायल फूलचंद्र का इलाज शहाबपुर स्थित एक निजी चिकित्सक के यहां चल रहा है, जहां उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। थाना प्रभारी दुर्गा प्रसाद शुक्ला ने बताया कि फिलहाल पीड़ित पक्ष की ओर से कोई तहरीर नहीं दी गई है।
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