यौन शोषण मामले में फसें अविमुक्तेश्वरानंद पर लटकी जेल की तलवार, सुनवाई पर बोले-आरोप बेबुनियाद 

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
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प्रयागराज। बटुकों के यौन शोषण के आरोपों का सामना कर रहे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की अग्रिम जमानत याचिका पर शुक्रवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय में सुनवाई होगी। उच्च न्यायालय के सूत्रों ने बताया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की अग्रिम जमानत याचिका 'कोर्ट नंबर 72' में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की गयी है।

इस बीच, सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी-झूंसी) विमल किशोर मिश्रा ने बताया कि कथित पीड़ित बटुकों का मेडिकल परीक्षण करा लिया गया है और रिपोर्ट सीलबंद लिफाफा में जांच अधिकारी को सौंप दी गई है। 

हालांकि, उन्होंने मेडिकल रिपोर्ट की विषयवस्तु पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि सीलबंद लिफाफे में मेडिकल रिपोर्ट अदालत के समक्ष रखी जाएगी। इक्कीस फरवरी को आशुतोष ब्रह्मचारी के आवेदन पर एक विशेष पॉक्सो अदालत ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ बटुकों के साथ यौन शोषण के आरोपों की जांच के लिए झूंसी थाने के प्रभारी को प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था।

आशुतोष ब्रह्मचारी ने बुधवार को कथित पीड़ित बटुकों को मीडिया के समक्ष पेश किया था। एक बटुक ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी पर यौन शोषण करने और प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। 

शंकराचार्य का दावा : मैंने भी आशुतोष ब्रह्मचारी पर मुकदमा दर्ज कराया 

ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि उन्होंने खुद के ऊपर प्राथमिकी दर्ज कराने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया है। शंकराचार्य ने यहां संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने पॉक्सो अधिनियम की धारा 22 के तहत आशुतोष ब्रह्मचारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। उन्होंने दावा किया, "पॉक्सो अधिनियम की धारा 22 में यह प्रावधान है कि अगर कोई आपके खिलाफ फर्जी मुकदमा करता है तो आप भी उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करवा सकते हैं।" 

उन्होंने यह भी दावा किया कि आशुतोष ब्रह्मचारी ने जिन दो नाबालिग लड़कों का यौन शोषण का आरोप लगाते हुए उन पर मुकदमा दर्ज कराया है, वे लंबे समय से आशुतोष के पास ही रह रहे हैं। उन्होंने दोनों लड़कों के मेडिकल परीक्षण में उनके साथ दुष्कर्म की पुष्टि होने का दावा भी किया।

शंकराचार्य ने खुद पर लगे यौन शोषण के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि माघ मेले मेले के दौरान वह सीसीटीवी कैमरा और मीडिया के कैमरे के सामने रहे। उन्होंने कहा कि इसके अलावा जिन लड़कों के यौन शोषण का आरोप लगाया गया है वह कभी उनके गुरुकुल में दाखिल तक नहीं हुए। 

अपने मठ में शीश महल और स्विमिंग पूल होने के सवाल पर शंकराचार्य ने कहा, "हमारा छोटा सा मठ है। उसमें 150 से 200 लोग कैसे रहते हैं यह हम ही लोग जानते हैं। यहां कोई भी गुप्त स्थान, शीश महल अथवा स्विमिंग पूल नहीं है। जब हमारे गुरु जी यहां रहते थे तब उनको डॉक्टर ने व्यायाम करने के लिए कहा था, तब उनके लिए व्यवस्था बनाई गई थी और यह व्यवस्था अब बंद पड़ी हुई है।" 

अविमुक्तेश्वरानंद ने बुधवार को आरोप लगाया था कि उत्तर प्रदेश में अपराधियों का राज है, वे आरोप लगाते हैं और जांच को प्रभावित करते हैं। शंकराचार्य ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में अपने फोन पर एक व्हाट्सएप ग्रुप दिखाया और आरोप लगाया कि इसे उनके खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कराने वाले आशुतोष पांडेय उर्फ ​​आशुतोष ब्रह्मचारी नाम के एक व्यक्ति ने बनाया है और उस ग्रुप में उनके खिलाफ मामले से जुड़ी जानकारी साझा की जा रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि आशुतोष ब्रह्मचारी ने जिन दो नाबालिग लड़कों के यौन शोषण का आरोप लगाते हुए उन पर मुकदमा दर्ज कराया है वह लंबे समय से आशुतोष के पास ही रह रहे हैं। 

उन्होंने यह भी दावा किया कि दोनों लड़कों के मेडिकल परीक्षण में उनके साथ दुष्कर्म की पुष्टि हुई है। शंकराचार्य ने कहा, "अगर उन बच्चों के साथ कुछ भी गलत हुआ है, तो यह उनके साथ रहने वालों ने ही किया होगा। हमारा उनसे कोई संपर्क नहीं था। लेकिन अगर कोई कहानी बनाना चाहता है, तो वह कुछ भी बना सकता है।"

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी तथा दो-तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ पिछली 21 फरवरी को प्रयागराज के झूंसी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि पिछले साल शंकराचार्य और अन्य आरोपियों ने अपने गुरुकुल और हाल ही में संपन्न माघ मेले सहित धार्मिक सभाओं में एक नाबालिग समेत दो लोगों का यौन शोषण किया था। 

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