14 एकादशी, अब 15 को मनेगी मकर संक्रांति, भगवान सूर्य के मंदिर में होंगे विशेष धार्मिक अनुष्ठान
अयोध्या, अमृत विचार : रामनगरी के मठ मंदिरों में 15 जनवरी को ही मकर संक्रांति मनाई जाएगी। हिंदू धर्म में यह पर्व बड़े उत्सव के साथ मनाते हैं। इस वर्ष मकर संक्रांति 14 जनवरी देर शाम 9.19 पर लग रही है, लेकिन इसके पूर्व उदय कालिक एकादशी होने के कारण इसे 15 जनवरी को ही मनाया जाएगा। ज्योतिशाचार्य करुणा निधान के अनुसार सूर्य देव को ग्रहों का राजा कहा जाता है।
ज्योतिष शास्त्र में 12 राशियां व 12 घर का मूल सिद्धांत है। सूर्य एक महीना हर राशि में बिताते हैं। अर्थात 30 दिन में सूर्य दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं। इसका मतलब जब सूर्य देव एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं तो उसे संक्रांति कहते हैं। इसी प्रकार जब-जब सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो वेदों के अनुसार उस दिन को मकर संक्रांति कहते हैं। इस दिन सूर्य उत्तरायण में होते हैं। मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि देव के घर आते हैं।
राम मंदिर के परकोटा में स्थित भगवान सूर्य के मंदिर में मकर संक्रांति पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया जाएगा। सूर्य मंदिर में 15 जनवरी को ब्रह्म मुहूर्त पर वैदिक आचार्य और पुजारियों के द्वारा वैदिक मत्रों का पारायण और हवन पूजन करेंगे। ट्रस्ट के व्यवस्था प्रभारी गोपाल जी राव ने बताया कि मकर संक्रांति पर रामलला को खिचड़ी और अन्य व्यंजनों का विशेष प्रसाद से भोग लगाया जाएगा। परकोटा के पश्चिम और दक्षिण दिशा के बीच स्थापित सूर्य मंदिर में पूजन-अर्चन किया जाएगा।
दाल की खिचड़ी व तिल के लड्डू का करें दान
इस वर्ष 14 जनवरी को रात्रि 09:19 के बाद सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे और 15 जनवरी को दोपहर 01:23 मिनट तक मकर संक्रांति रहेगी। इसलिए 15 जनवरी को ही सुबह स्नान करने के बाद सूर्य देव, विष्णु जी व लक्ष्मी देवी की पूजा का विशेष महत्व है। सुबह स्नान करके दान करने के बाद ही भोजन करना चाहिए। इस दिन उड़द की दाल की खिचड़ी व तिल के लड्डू का दान करना चाहिए।
गरीबों को कंबल-वस्त्र बांटने चाहिए। रंग-बिरंगे वस्त्र, विशेषकर पीले वस्त्र धारण करने चाहिए। संक्रांति पर्व पर मांस-मंदिरा और तामसिक भोजन से परहेज करें। इस दिन चावल, चना, मूंगफली, गुड़, तिल, उड़द की दाल इत्यादि से बनी सामग्री का सेवन करना चाहिए।
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