TMC का डिजिटल वार: अभिषेक बनर्जी बोले- BJP के 'सूचना युद्ध' का जवाब दें युवा, बनें बंगाल के 'डिजिटल योद्धा'!

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
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कोलकाता/नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल सरकार के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी के "बहुआयामी, लगातार और सोचे-समझे" हमले का मुकाबला करने के लिए एक आक्रामक, समन्वित डिजिटल अभियान चलाने का आह्वान किया है और युवाओं से इस तरह के 'सूचना युद्ध' में राज्य के अग्रिम पंक्ति के रक्षक बनने की अपील की। तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने एबीडीजे कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा लोकतांत्रिक संस्थानों का राजनीतिकरण कर रही है और सोशल मीडिया ट्रोल सेनाओं तथा "गोदी मीडिया के एक आज्ञाकारी वर्ग" के माध्यम से बंगाल के खिलाफ लगातार "बदनामी अभियान" चला रही है। 

अभिषेक बनर्जी ने कहा, "आज लोकतांत्रिक संस्थानों का राजनीतिकरण हो गया है। उन्हें बंगाल को बदनाम करने और राष्ट्रीय दर्शकों के सामने हमारी उपलब्धियों को बदनाम करने के एक ही एजेंडे के उपकरणों में बदल दिया गया है। बंगाल पर भाजपा का हमला लगातार और सोची-समझी रणनीति के तहत है। हमारी प्रतिक्रिया भी उतनी ही व्यापक, समन्वित और जोरदार होनी चाहिए।"

अभिषेक  बनर्जी ने कहा कि लापरवाही महंगी पड़ सकती है। उन्होंने डिजिटल स्पेस को "असुरक्षित" छोड़ने के खिलाफ चेतावनी देते हुए तर्क दिया कि अनियंत्रित गलत सूचना "जनमत पर अपरिवर्तनीय रूप से गंभीर असर डाल सकती है और उस उपलब्घि को कमजोर कर सकती है जिसे हमने इतनी मेहनत से वापस पाने के लिए संघर्ष किया है। इसलिए बंगाल के युवाओं को अब यह जिम्मेदारी लेनी होगी। एबीडीजे कॉन्क्लेव ने मुझे अपार गर्व और आशा से भर दिया। हजारों डिजिटल योद्धा एक साथ आए। सीखने के लिए उत्सुक, अपने कौशल को तेज करने के लिए उत्सुक, और बंगाल की सच्चाई की रक्षा करने के लिए तैयार।"

अभिषेक बनर्जी ने अपने व्हाट्सएप चैनल पर कहा कि कॉन्क्लेव में प्रतिभागियों ने सोशल मीडिया रणनीति, विकसित हो रहे कंटेंट निर्माण, तथ्य-जांच, बातों को कहने की शैली पर नियंत्रण और गलत सूचना का मुकाबला करने पर विशेषज्ञ-नेतृत्व वाले सत्रों में भाग लिया, जो पार्टी के राजनीतिक युद्ध में डिजिटल बढ़ते फोकस को दर्शाता है। युवा स्वयंसेवकों को "बंगाल का डिजिटल बैरिकेड" करार देते हुए श्री बनर्जी ने 100-दिवसीय कार्य योजना प्रस्तुत की, जिसमें अनुशासन, निरंतरता और मापने योग्य परिणामों का आह्वान किया गया।

उन्होंने कहा, "अगले 100 दिनों के लिए उन्हें अपना सब कुछ देना होगा। पांच-दिवसीय लक्ष्य निर्धारित करें, प्रगति को सख्ती से ट्रैक करें और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ें।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सफलता जन प्रतिनिधियों, बूथ-स्तरीय कार्यकर्ताओं और डिजिटल स्वयंसेवकों के बीच घनिष्ठ समन्वय पर निर्भर करेगी। उन्होंने कहा, "जब वे सहज समन्वय में काम करते हैं, तो कोई भी पहाड़ बहुत ऊंचा नहीं होता और कोई भी प्रचार बहुत मजबूत नहीं होता।"

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