मकर संक्रांति पर बाजारों में गजक और तिल-मिष्ठानों की धूम..., गजक और तिल के लड्डू की मांग ज्यादा

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Published By Muskan Dixit
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लखनऊ, अमृत विचारः मकर संक्रांति के दो दिन पहले ही शहर के बाजार गजक, तिल के लड्डू, काजू पट्टी, काजू रोल, तिल की बर्फी से महकने लगे हैं। 13 से अधिक किस्म की गजक उपलब्ध है। व्यवसायियों के अनुसार एक-एक दुकान पर रोजाना 50 से 60 किलो तक मिठाई तैयार की जा रही है।

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तिल और गुड़ से बनी मिठाइयों के दाम बढ़ने के बावजूद मांग में कोई कमी नहीं आई है। मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ का विशेष महत्व होता है। इस दिन इनका उपयोग पूजा-पाठ के साथ-साथ दान-पुण्य में भी किया जाता है।

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गणेशगंज निवासी वृद्धा विमलादेवी बताती हैं कि पहले पौष माह शुरू होते ही घर में तिल और गुड़ से लड्डू बनाए जाते थे। तिल को धोकर, सुखाकर, सेंकने के बाद गुड़ की चाशनी में मिलाकर लड्डू तैयार किए जाते थे। भगवान को भोग लगाने के बाद पूरे माह लड्डू खाए जाते थे और संक्रांति के दिन विशेष रूप से बड़ी मात्रा में लड्डू बनाए जाते थे। उन्होंने कहा कि अब उम्र के कारण इतनी मेहनत संभव नहीं है और नई पीढ़ी में भी घर पर लड्डू बनाने का रुझान कम हो गया है। ऐसे में बाजार से मिठाइयां खरीदकर ही पूजा और परंपराएं निभाई जा रही हैं।

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