India-Pakistan Tension: सर क्रीक की दलदली जमीन ने फिर बढ़ाई टेंशन, भारत-पाकिस्तान के लिए 'सोने की खान' क्यों बनी यह विवादित पट्टी?

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Published By Muskan Dixit
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India-Pakistan Tension: भारत और पाकिस्तान के बीच सर क्रीक का विवाद फिर से सुर्खियों में है। हाल के महीनों में पाकिस्तान ने इस क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी तेज कर दी है – अतिरिक्त सैनिक, मिसाइल सिस्टम, ड्रोन क्षमता और एयर डिफेंस नेटवर्क को मजबूत किया गया है। भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अक्टूबर 2025 में भुज में सैनिकों को संबोधित करते हुए साफ चेतावनी दी कि कोई भी हरकत "इतिहास और भूगोल दोनों बदल" देगी।

यह सुनकर लगता है कि कोई छोटी-सी दलदली पट्टी इतनी तनाव क्यों पैदा कर रही है? आइए समझते हैं कि यह 96 किलोमीटर लंबा ज्वारीय मुहाना (tidal estuary) दोनों देशों के लिए क्यों इतना कीमती है।

सर क्रीक क्या है और कहाँ है?

सर क्रीक गुजरात के कच्छ के रण और पाकिस्तान के सिंध प्रांत के बीच फैला एक दलदली, कीचड़ भरा इलाका है, जो अरब सागर में खुलता है। पहली नज़र में यह वीरान, सांप-बिच्छू और दलदल से भरा लगता है – न सड़कें, न आबादी, न कोई खास बुनियादी ढांचा। लेकिन यही 'बेकार' लगने वाली ज़मीन समुद्री सीमाओं का गेम-चेंजर है।

ब्रिटिश काल से चला आ रहा विवाद

विवाद की जड़ें 1914 में ब्रिटिश काल के सिंध-कच्छ समझौते तक जाती हैं।  

- पाकिस्तान का दावा: सीमा सर क्रीक के पूर्वी किनारे से गुजरती है, जिससे पूरा क्रीक सिंध (पाकिस्तान) का हिस्सा बन जाता है।  

- भारत का दावा: अंतरराष्ट्रीय कानून के थलवेग सिद्धांत (thalweg principle) के मुताबिक सीमा मुख्य जलधारा के बीच से होनी चाहिए। भारत 1925 के नक्शे और बीच में लगाए गए खंभों का हवाला देता है।  

1968 में अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल ने कच्छ के बड़े हिस्से का फैसला किया (भारत को 90%, पाकिस्तान को 10%), लेकिन सर क्रीक का मुद्दा अनसुलझा रह गया। तब से दर्जनों दौर की बातचीत के बावजूद कोई हल नहीं निकला।

असली वजह: तेल-गैस, EEZ और आर्थिक दांव-पेंच

यह विवाद सिर्फ ज़मीन का नहीं, बल्कि समुद्री क्षेत्र और विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) का है।  

- अगर भारत की बात मानी गई, तो अरब सागर में भारत को बड़ा हिस्सा मिलेगा – जहां तेल-गैस के भंडार छिपे हो सकते हैं।  

- पाकिस्तान की बात चली तो भारत का EEZ सिमट जाएगा, और आर्थिक नुकसान होगा।  

यह इलाका मछली संसाधनों से भी भरपूर है, जो दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण है।

मछुआरों की जिंदगी और मानवीय संकट

सीमा अस्पष्ट होने से भारतीय और पाकिस्तानी मछुआरे अक्सर एक-दूसरे के पानी में चले जाते हैं। नतीजा? सैकड़ों मछुआरे गिरफ्तार, जेल में बंद, और उनके परिवार सालों इंतजार करते हैं। यह सिर्फ सीमा विवाद नहीं, बल्कि एक गंभीर मानवीय समस्या भी बन चुका है।

सुरक्षा का सबसे नाजुक मोर्चा

2008 के मुंबई हमलों के बाद समुद्री सुरक्षा पर फोकस बढ़ा। सर क्रीक से आतंकी घुसपैठ का खतरा हमेशा बना रहता है – खाली नावें, संदिग्ध जहाज मिलने पर अलर्ट जारी होते हैं। हाल में पाकिस्तान की बढ़ती सैन्य हलचल (रडार, मिसाइल, ड्रोन) ने इसे और संवेदनशील बना दिया है। भारत इसे रणनीतिक रूप से बेहद अहम मानता है, क्योंकि यहां से कराची तक का रास्ता खुल सकता है।

अगर आपको संक्षेप में बताएं तो सर क्रीक कोई साधारण दलदल नहीं है। यह आर्थिक खजाना, समुद्री शक्ति और सुरक्षा का गेटवे है। दोनों देशों के लिए यह 'प्यारी' इसलिए है क्योंकि हारने पर बहुत कुछ दांव पर लग जाता है। तनाव बढ़ रहा है, लेकिन उम्मीद है कि बातचीत से कोई रास्ता निकलेगा।

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