केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर से मरीजों की दलाली पर शासन ने मांगी रिपोर्ट, अमृत विचार की खबर पर संज्ञान, कुलसचिव से मांगी गई रिपोर्ट, जांच के निर्देश

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Published By Muskan Dixit
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लखनऊ, अमृत विचार : किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के ट्रॉमा सेंटर से मरीजों को निजी अस्पताल ले जाने के दलाली प्रकरण को शासन ने गंभीरता से लिया है। मामले में शासन ने केजीएमयू के कुलसचिव को पत्र भेजकर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है और नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। शासन के इस कदम के बाद केजीएमयू प्रशासन में हड़कंप मच गया है। इस पूरे प्रकरण को अमृत विचार ने 31 दिसंबर के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था।

बलरामपुर जिले के खैरा निवासी राम भिलाव की तबीयत 26 दिसंबर को अचानक बिगड़ गई थी। परिजन उन्हें बलरामपुर के अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां से डॉक्टरों ने केजीएमयू रेफर कर दिया। उसी दिन परिजन मरीज को केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर लेकर पहुंचे, लेकिन वहां डॉक्टरों ने बेड उपलब्ध न होने की बात कह दी।

इसी दौरान मरीज के बेटे सुनील के मोबाइल पर एक कॉल आई। कॉल करने वाले व्यक्ति ने सस्ते इलाज का झांसा देकर निजी अस्पताल में भर्ती कराने का प्रस्ताव दिया। कुछ ही देर बाद ट्रॉमा सेंटर के गेट पर एक एंबुलेंस पहुंची। एंबुलेंस में बैठे व्यक्ति ने सात हजार रुपये में इलाज कराने की बात कही और मरीज को गोमतीनगर के विभूतिखंड स्थित एक निजी अस्पताल ले जाया गया।

निजी अस्पताल में इलाज के नाम पर परिजनों से 36 हजार रुपये वसूल लिए गए और इसके बाद और बिल थमा दिया गया। भुगतान न करने पर अस्पताल प्रशासन ने मरीज को बंधक बना लिया। मजबूर होकर परिजनों ने पुलिस कंट्रोल रूम 112 पर सूचना दी, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और मरीज को मुक्त कराया।

मामले को गंभीरता से लेते हुए शासन के अनुसचिव ज्ञानेंद्र कुमार शुक्ला ने 14 जनवरी को केजीएमयू के कुलसचिव को पत्र भेजकर पूरे प्रकरण की रिपोर्ट तलब की है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

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