कर्तव्य पथ पर शौर्य, स्वदेशी हथियार और आत्मनिर्भर भारत की झलक, गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय नौसेना करेगी प्रदर्शन

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Published By Anjali Singh
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दिल्ली। गणतंत्र दिवस परेड में कर्तव्य पथ पर इस बार भारतीय नौसेना अपने मार्चिंग दस्ते, झांकी और बैंड के माध्यम से परंपरा, आत्मनिर्भरता और भविष्य की तैयारियों का सशक्त संगम प्रस्तुत करेगी। टुकड़ी के कमांडर लेफ्टिनेंट करण नाग्याल ने मंगलवार को यहां कहा कि यह प्रस्तुति 'विकसित और समृद्ध भारत के लिए समुद्रों की सुरक्षा करने वाली युद्ध के लिए तत्पर, सुसंगठित और आत्मनिर्भर शक्ति' के रूप में नौसेना की परिकल्पना को दर्शाएगी। 

लेफ्टिनेंट नाग्याल ने कहा कि गणतंत्र दिवस परेड राष्ट्रीय एकता का भव्य उत्सव है जो भारत की सांस्कृतिक विविधता, सैन्य सामर्थ्य और तकनीकी प्रगति को प्रदर्शित करती है, तथा इसमें शामिल सभी घटक राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। 

इस वर्ष नौसेना के मार्चिंग दस्ते में 144 युवा नौसैनिक शामिल होंगे जो ऐतिहासिक कर्तव्य पथ पर कंधे से कंधा मिलाकर मार्च करेंगे। यह टुकड़ी भारत के समुद्री हितों की रक्षा करने में सक्षम, प्रगतिशील और सशक्त समुद्री शक्ति के रूप में नौसेना का प्रतीक होगी। 

'मिनी-इंडिया' का प्रतिनिधित्व करते इस दस्ते में विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के नाविक शामिल हैं, जिनकी औसत आयु 25 वर्ष है। नौसेना की सभी शाखाओं से सावधानीपूर्वक चयनित इन कर्मियों ने परेड की कठिन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए दो माह से अधिक का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया है। दस्ते का नेतृत्व लेफ्टिनेंट करण नाग्याल करेंगे, जबकि लेफ्टिनेंट पवन कुमार गांधी, लेफ्टिनेंट प्रीति कुमारी और लेफ्टिनेंट वरुण द्रेवेरिया प्लाटून कमांडर के रूप में कार्य करेंगे। 

नौसेना की 2026 की झांकी 'मजबूत राष्ट्र के लिए मजबूत नौसेना' की थीम को सजीव रूप से प्रस्तुत करेगी, जिसमें सेवा की बहुआयामी क्षमताओं और किसी भी समय, कहीं भी और किसी भी प्रकार से समुद्री हितों की रक्षा करने के उसके संकल्प को दर्शाया जाएगा। यह झांकी भारत की समृद्ध समुद्री विरासत से लेकर आधुनिक, स्वदेशी युद्धक शक्ति तक की यात्रा को प्रदर्शित करेगी। 

इसमें पांचवीं शताब्दी की सिली हुई नौका जिसे अब आईएनएसवी कौंडिन्य नाम दिया गया है, मराठा नौसेना के 'गुराब' श्रेणी के जहाज, तथा अग्रिम पंक्ति के स्वदेशी प्लेटफॉर्म जैसे विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत, पी-17ए नीलगिरी श्रेणी के स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस हिमगिरि और आईएनएस उदयगिरि, कलवरी श्रेणी की पनडुब्बी और जीसैट-7आर (प्रोजेक्ट रोहिणी) संचार उपग्रह शामिल होंगे। 

झांकी में आईएनएसवी तारिणी के चालक दल द्वारा नविका सागर परिक्रमा-II अभियान के दौरान अपनाए गए विश्व परिक्रमा मार्ग को भी प्रदर्शित किया जाएगा। इस झांकी की संकल्पना और डिजाइन नौसेना के वारशिप डिजाइन ब्यूरो के कमांडर जुबैर सिद्दीकी और लेफ्टिनेंट लेख्श्मी के. रवि द्वारा की गई है। 

एक विशेष आयाम जोड़ते हुए मुंबई स्थित एक गैर-सरकारी संगठन सी कैडेट कोर की युवा बालिका कैडेट जो युवाओं को बुनियादी नौकायन कौशल प्रदान करता है, झांकी के साथ मार्च करेंगी। यह कई दशकों के बाद गणतंत्र दिवस परेड में उनकी वापसी को चिह्नित करेगा। 

नौसेना के 80 संगीतकारों से युक्त बैंड का नेतृत्व मास्टर चीफ पेटी ऑफिसर म्यूजिशियन फर्स्ट क्लास एम. एंटनी राज करेंगे। यह बैंड 29 जनवरी को बीटिंग रिट्रीट समारोह के दौरान भावनात्मक और उत्साहवर्धक धुनों की प्रस्तुति देगा, जो जटिल संरचनाओं के साथ सुसज्जित होंगी। उल्लेखनीय है कि बैंड में छह महिला अग्निवीर संगीतकार भी शामिल हैं। 

इस अवसर पर नौसेना के कंट्रोलर पर्सनल सर्विसेज वाइस एडमिरल प्रवीन नायर ने कहा कि नौसेना की भागीदारी केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि आत्मनिर्भरता के माध्यम से भारत के समुद्री हितों की रक्षा करने के उसके संकल्प का प्रतिबिंब है। उन्होंने कहा कि 'परंपरा में निहित, आत्मनिर्भरता और नवाचार की ओर अग्रसर' थीम पर आधारित यह झांकी प्रधानमंत्री के 'समुद्र से समृद्धि' के दृष्टिकोण से प्रेरित है और भारत को एक आत्मनिर्भर, वैश्विक, प्रगतिशील और भविष्य के लिए तैयार समुद्री शक्ति के रूप में प्रस्तुत करती है। 

रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता विजय कुमार ने कहा कि गणतंत्र दिवस परेड एक राष्ट्रीय प्रयास है जो तीनों सेनाओं और अन्य रक्षा संगठनों के बीच संयुक्त योजना, घनिष्ठ समन्वय और निर्बाध एकीकरण पर आधारित है। देश की रक्षा व्यवस्था में संयुक्तता को केंद्रीय तत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि यह परेड सरकार के एकीकृत, चुस्त और आधुनिक सशस्त्र बलों के दृष्टिकोण के अनुरूप तत्परता, पेशेवर दक्षता और उद्देश्य की एकता को प्रदर्शित करती है, जो भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हैं।

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