सैफी-सैडी सिस्टम बने शो-पीस...14 लाख उपभोक्ताओं की सप्लाई प्रभावित, मॉनिटरिंग ठप होने से जिम्मेदारी तय नहीं

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
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लखनऊ, अमृत विचार: बिजली आपूर्ति को बेहतर और पारदर्शी बनाने के लिए फीडरों पर लगाए गए सैफी और सैडी सिस्टम ठप होने से उपकेंद्रों पर बिजली कटौती की सही सूचना उच्चाधिकारियों तक नहीं पहुंच रही है। फाल्ट और ट्रिपिंग जैसी मामूली समस्या होने पर भी उपकेंद्र कर्मी एक से दो घंटे तक आपूर्ति बहाल नहीं करते हैं। दोनों अत्याधुनिक सिस्टम खराब होने से 14 लाख से अधिक उपभोक्ता कटौती की समस्या से जूझ रहे हैं।

पॉवर कॉरपोरेशन ने शहर के 150 से अधिक उपकेंद्रों के फीडर में सिस्टम एवरेज इंट्रेक्शन फ्रिवेंसी इंडेक्स (सैफी) और सिस्टम एवरेज इंट्रेक्शन ड्यूरेशन इंडेक्स सिस्टम (सैडी) लगाए थे। ये उपकरण ट्रिपिंग रोकने के लिए लगाए गए थे। किंतु मॉडम मरम्मत और नियमित रखरखाव न होने से ये उपकरण काम नहीं कर रहे हैं। इससे बार-बार बिजली गुल हो रही है। इससे 14 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

बिजली गुल होने पर उपकेंद्रों पर फोन पर उपभोक्ताओं को 10 से पंद्रह मिनट में आपूर्ति सामान्य होने का आश्वासन देकर टाल दिया जाता है। कई इलाकों में घंटों बिजली बाधित रहती है। सैफी और और सैडी निष्क्रिय ठप होने से उच्चाधिकारियों तक न तो ट्रिपिंग की सटीक संख्या पहुंच पा रही है और न ही बिजली गुल रहने की सही समय की जानकारी मिल रही है। इसका लाभ फील्ड स्तर के कर्मचारी और अधिकारी उठा रहे हैं, जो उपभोक्ताओं को फोन पर गलत जानकारी देकर वास्तविक स्थिति को छुपाने का काम कर रहे है। इससे उपभोक्ताओं की शिकायतों की पुष्टि नहीं हो पाती है।

जानकीपुरम के मुख्य अभियंता वीपी सिंह का दावा है कि उपकेंद्रों के फीडरों पर लगे मॉडम काम कर रहे हैं। आपूर्ति के बाधित होने से लेकर ट्रिपिंग समस्या की जानकारी भी मिल रही है। फिर भी अगर किसी उपकेंद्र पर समस्या आ रही है, तो उसका जल्द समाधान करा दिया जाएगा।

क्या है सैफी और सैडी तकनीक

सिस्टम एवरेज इंट्रेक्शन फ्रिवेंसी इंडेक्स और सिस्टम एवरेज इंट्रेक्शन ड्यूरेशन इंडेक्स लगाने का उद्देश्य ये जानना है कि किस फीडर से कितनी बार और कितनी देर के लिए आपूर्ति बाधित हुई है। सिस्टम ठीक होने पर फीडर की बिजली कटते ही उसकी जानकारी उसी समय जोन मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता और अधिशासी अभियंता तक पहुंच जाती है। 15 मिनट से अधिक बिजली गुल रहने पर संबंधित एसडीओ और जेई से जवाब तलब करने का नियम बना दिया गया था।

जवाबदेही तय करने की व्यवस्था ठप

सैफी-सैडी सिस्टम को लगाने के पीछे मकसद बिजली आपूर्ति के बाधित होने पर कर्मचारियों की लापरवाही पर जिम्मेदारी तय करना था। हर फीडर के डाटा के आधार पर यह साफ हो जाता था कि किस क्षेत्र में बार-बार फॉल्ट आ रहा है और सुधार क्यों नहीं हो रहा। अब सिस्टम बंद होने से न तो फॉल्ट एनालिसिस हो पा रहा है और न ही रखरखाव की कमियों की पहचान।

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