शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने सीएम योगी के 'कालनेमी' बयान पर जमकर किया पलटवार, बोले – जनता को पता चल गया असली कालनेमी कौन है!
प्रयागराज: माघ मेले के पावन संगम तट पर चल रहे विवाद ने अब राजनीतिक और धार्मिक रंग ले लिया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'कालनेमी' वाले बयान पर ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सीएम योगी पर निशाना साधते हुए कहा कि "कालनेमी कौन है, अब देश की जनता को अच्छी तरह पता चल गया है।" शंकराचार्य मौनी अमावस्या से ही धरने पर बैठे हैं और बसंत पंचमी के स्नान का बहिष्कार करने का ऐलान कर चुके हैं।
शंकराचार्य का तीखा हमला
अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, "बयानवीर न बनें सीएम योगी। आपकी गर्दन फंसी हुई है। अधिकारियों ने आपको कहीं का नहीं छोड़ा। मेरे साथ अपराध हुआ है, उसका संज्ञान लें। नोटिस के पीछे दुर्भावना साफ दिख रही है। 12 साल से सत्ता संभाले हैं, लेकिन गौहत्या रोक नहीं पाए। आप भी जवाबदेह हैं।" उन्होंने आगे कहा, "हम कोई सुख नहीं भोग रहे, जबकि आप राज गद्दी पर बैठे हैं। इसलिए बयानबाजी छोड़ें और जो अपराध हुआ है, उस पर कार्रवाई करें।"
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
यह सब 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन शुरू हुआ, जब शंकराचार्य की पालकी को संगम स्नान के लिए रोका गया। मेला प्रशासन ने उन्हें शंकराचार्य पद का सबूत मांगते हुए नोटिस चिपकाया। दूसरा नोटिस भी जारी हुआ, जिसमें बैरियर तोड़ने और जबरन भीड़ में प्रवेश के आरोप लगाए गए। प्रशासन ने चेतावनी दी कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर मेला में स्थायी प्रतिबंध और आवंटित जमीन-सुविधाएं वापस ली जा सकती हैं।
सीएम योगी का 'कालनेमी' बयान
हरियाणा के सोनीपत में एक धार्मिक कार्यक्रम में योगी आदित्यनाथ ने बिना नाम लिए कहा था कि "धर्म की आड़ में सनातन को कमजोर करने वाले कई कालनेमी हैं।" रामायण में कालनेमी एक मायावी राक्षस था, जो संत बनकर हनुमान जी को छलने की कोशिश करता है। योगी ने कहा कि संत के लिए धर्म और राष्ट्र सर्वोपरि हैं, व्यक्तिगत संपत्ति कुछ नहीं। ऐसे तत्वों से सावधान रहना चाहिए जो सनातन को कमजोर करने की साजिश रचते हैं।
केशव मौर्य ने शांति की अपील की
उधर, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने शंकराचार्य से प्रार्थना की कि वे स्नान करें और विवाद को समाप्त करें। उन्होंने कहा, "शंकराचार्य के चरणों में प्रणाम है। उनसे आग्रह है कि इस विषय का समापन करें।"
यह विवाद अब असली-नकली संत और सनातन धर्म की रक्षा तक पहुंच गया है। फिलहाल शंकराचार्य का धरना जारी है, जबकि प्रशासन सख्त रुख अपनाए हुए है।
