Economic Survey 2026: लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किया इकोनॉमिक सर्वे, जानें इसकी मुख्य बातें

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Published By Anjali Singh
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दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को लोकसभा में वर्ष 2025-26 की आर्थिक समीक्षा पेश की। उन्होंने सदन में प्रश्नकाल समाप्त होते ही सदन में आर्थिक समीक्षा प्रस्तुत की। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आवश्यक कागजात प्रस्तुत कराए। उन्होंने पिछले दिनों दिल्ली में आयोजित राष्ट्रमंडल देशों की संसद के पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन का भी उल्लेख किया।

इसके बाद कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई। सीतारमण आगामी रविवार, एक फरवरी को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए केंद्रीय बजट पेश करेंगी। संसद के वर्तमान बजट सत्र का पहला चरण बुधवार को लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण के साथ शुरू हुआ। 

सत्र का पहला चरण 13 फरवरी तक चलेगा, जिसमें राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को लेकर चर्चा होगी और उसे पारित किया जाएगा। इसी चरण में केंद्रीय बजट पर भी चर्चा होगी। इसके बाद सदन की बैठक दोबारा नौ मार्च को शुरू होगी और दूसरे चरण की समाप्ति के लिए दो अप्रैल की तारीख निर्धारित की गई है।

आर्थिक समीक्षा 2025-26 की मुख्य बातें

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को संसद में आर्थिक समीक्षा 2025-26 पेश की।

इसकी मुख्य बातें इस प्रकार हैं

भारत की संभावित वृद्धि दर लगभग सात प्रतिशत आंकी गई है, जबकि वित्त वर्ष 2026-27 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है।

वित्त वर्ष 2025-26 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर प्रथम अग्रिम अनुमान के अनुसार 7.4 प्रतिशत और सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान।

समीक्षा में कृत्रिम मेधा (एआईत) की तेजी से उत्पादकता में अपेक्षित वृद्धि नहीं होने से व्यापक वित्तीय संकट के प्रति आगाह किया गया जिससे अत्यधिक आशावादी परिसंपत्ति मूल्यांकन में कमी आ सकती है।

रुपये में गिरावट भारत की उत्कृष्ट आर्थिक बुनियाद को सटीक रूप से प्रतिबिंबित नहीं करती है।

बाहरी वातावरण अनिश्चित बना हुआ है। भारत को सतर्क रहने की जरूरत है लेकिन निराशावादी होने का कोई कारण नहीं है।

समीक्षा में 'गिग' कर्मियों के लिए काम की शर्तों को नया रूप देने वाली नीति की वकालत की गई है।

यूरोप के साथ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) भारत की विनिर्माण प्रतिस्पर्धात्मकता, निर्यात क्षमता और रणनीतिक क्षमता को मजबूत करेगा।

स्वदेशी को एक अनुशासित रणनीति के रूप में लागू करने के पक्षधरों का कहना है कि आयात प्रतिस्थापन के सभी विकल्प न तो व्यवहार्य हैं और न ही वांछनीय।

समीक्षा में 'राष्ट्रीय कच्चा माल लागत कटौती' रणनीति की मांग की गई है।

इसमें 'स्वदेशी' से 'रणनीतिक अनिवार्यता' की ओर बढ़ने का सुझाव दिया गया है ताकि दुनिया '' भारतीय उत्पाद खरीदने के बारे में सोचने'' से ''बिना सोचे समझे भारतीय उत्पाद खरीदने'' की ओर अग्रसर हो सके।

वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित निवेश के रूप में सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं की निरंतर मांग के कारण इनकी कीमतों में वृद्धि जारी रहने की संभावना है।

केंद्र सरकार की राजस्व प्राप्तियां वित्त वर्ष 2024-25 (अस्थायी) में बढ़कर जीडीपी के 9.2 प्रतिशत पर पहुंच गईं।

सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां सितंबर, 2025 में घटकर 2.2 प्रतिशत पर आ गईं, जो कई दशक का निचला स्तर है।

प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत मार्च, 2025 तक 55.02 करोड़ बैंक खाते खोले जा चुके हैं, जिनमें से 36.63 करोड़ खाते ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में हैं।

वित्त वर्ष 2025-26 (दिसंबर 2025 तक) के दौरान 2.35 करोड़ डीमैट खाते जोड़े गए, जिससे इनकी कुल संख्या 21.6 करोड़ से अधिक हो गई। सितंबर, 2025 में विशिष्ट निवेशकों की संख्या 12 करोड़ के पार पहुंच गई जिनमें लगभग 25 प्रतिशत महिलाएं हैं।

'विकसित भारत–जी राम जी', महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना का एक व्यापक वैधानिक सुधार है। इसका उद्देश्य ग्रामीण रोजगार को विकसित भारत 2047 के दीर्घकालिक दृष्टिकोण के अनुरूप बनाना है।

उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजनाओं के तहत 14 क्षेत्रों में दो लाख करोड़ रुपये से अधिक का वास्तविक निवेश आकर्षित हुआ है। इससे 18.7 लाख करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त उत्पादन/बिक्री और 12.6 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं (सितंबर, 2025 तक)।

 

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