यूपी बना ‘मोस्ट प्रोएक्टिव स्टेट’, सरकार की विमानन नीति को मिला राष्ट्रीय सम्मान, नॉन-प्रायोरिटी एरिया श्रेणी में अव्वल

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Published By Anjali Singh
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लखनऊ, अमृत विचार: प्रदेश ने रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम (आरसीएस–उड़ान) के तहत एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए देश में अपनी सशक्त पहचान दर्ज कराई है। प्रदेश को नॉन-प्रायोरिटी एरिया श्रेणी में ‘मोस्ट प्रोएक्टिव स्टेट’ का राष्ट्रीय अवॉर्ड प्रदान किया गया है। यह श्रेणी उन राज्यों के लिए है, जो न तो पर्वतीय हैं और न ही उत्तर-पूर्व क्षेत्र में आते हैं। यह सम्मान उत्तर प्रदेश को देश के विमानन मानचित्र पर एक अग्रणी और सक्रिय राज्य के रूप में स्थापित करता है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में योगी सरकार ने कनेक्टिविटी को विकास का मजबूत आधार बनाया है। बीते वर्षों में हवाई अड्डों के आधुनिकीकरण, नए रनवे, नाइट लैंडिंग सुविधाओं के विस्तार और क्षेत्रीय उड़ानों को प्रोत्साहन देकर छोटे शहरों को बड़े महानगरों से जोड़ा गया। आरसीएस–उड़ान योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश ने गैर-प्राथमिक राज्यों की श्रेणी में सबसे तेज प्रगति दर्ज की, जिसके चलते यह राष्ट्रीय सम्मान मिला।

प्रदेश नागरिक उड्डयन के निदेशक ईशान प्रताप सिंह के अनुसार, योगी सरकार की विमानन नीतियों का असर यात्री आंकड़ों में साफ दिखाई देता है। वर्ष 2016 में प्रदेश में कुल 59.97 लाख हवाई यात्री थे, जो 2024 में बढ़कर 1.28 करोड़ से अधिक हो गए। वर्ष 2025 तक यह संख्या 1.55 करोड़ से अधिक पहुंच गई। बीते नौ वर्षों में लगभग 9.98 प्रतिशत की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (सीएजीआर) से यात्री यातायात में वृद्धि हुई है।

घरेलू उड़ानों के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की है। 2016 में जहां घरेलू यात्रियों की संख्या 52.30 लाख थी, वहीं 2024 में यह बढ़कर 1.16 करोड़ से अधिक और 2025 में 1.41 करोड़ से अधिक हो गई। इससे व्यापार, निवेश और पर्यटन को नई गति मिली है। अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की संख्या भी 2016 के 7.66 लाख से बढ़कर 2024 में 12.63 लाख और 2025 में 13.37 लाख से अधिक पहुंच गई।

प्रदेश में विकसित हो रहे नए हवाई अड्डे और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी नेटवर्क उत्तर प्रदेश को देश का प्रमुख विमानन और लॉजिस्टिक्स हब बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभा रहे हैं। विशेष रूप से नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (जेवर) जैसे प्रोजेक्ट भविष्य में प्रदेश की वैश्विक कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देने वाले हैं।

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