Maghi Purnima 2026: श्रद्धालु पुष्य नक्षत्र में लगाएंगे आस्था की डुबकी, माघी पूर्णिमा पर बन रहा दुर्लभ संयोग

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Published By Anjali Singh
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वाराणसी। इस बार माघी पूर्णिमा के दिन दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। एक साथ सात शुभ योग और पुष्य नक्षत्र की युति में श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा सकेंगे। सूर्य और चंद्रमा के विशेष योग के साथ पुष्य नक्षत्र का संयोग अत्यंत फलदायी होगा। यह योग 1 फरवरी की भोर से 2 फरवरी की भोर तक रहेगा। पूर्णिमा तिथि चंद्रमा को अत्यंत प्रिय मानी जाती है। 

बटुक भैरव मंदिर के महंत एवं वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य जितेंद्र मोहन पूरी ने बताया कि माघ पूर्णिमा की तिथि 1 फरवरी को प्रातः 5.19 बजे से अगले दिन 2 फरवरी को प्रातः 3.46 बजे तक रहेगी। उदय तिथि के अनुसार माघ पूर्णिमा का स्नान इसलिए 1 फरवरी को अत्यंत फलदायी होगा। 

इस दिन विशेष प्रीति योग, रवि योग, सर्वार्थसिद्धि योग, रवि आयुष्मान योग, श्रीवत्स योग और उत्तम योग बनेंगे। 1 फरवरी को काशी के गंगा घाटों अथवा प्रयागराज के संगम में स्नान करने से अनन्य फल की प्राप्ति तथा पापों का नाश होता है। इस दिन वस्त्र, अनाज, फल आदि का दान करना चाहिए। 

माघ पूर्णिमा स्नान के लिए तीन विशेष मुहूर्त बन रहे हैं। ब्रह्म मुहूर्त - 1 फरवरी को प्रातः 5.24 बजे से 6.18 बजे तक, रवि पुष्य योग - प्रातः 7.09 बजे से रात्रि 11.58 बजे तक और मीन लग्न मुहूर्त - प्रातः 8.46 बजे से 10.15 बजे तक रहेगा। रविवार को भगवान भास्कर (सूर्यदेव) का दिन माना जाता है। 

इस दिन गंगा या किसी अन्य पवित्र नदी/जलाशय में स्नान करने के बाद जल में खड़े होकर सूर्यदेव की कुछ देर आराधना अवश्य करनी चाहिए। साथ ही भगवान श्रीहरि विष्णु को पीले पुष्प और मिष्ठान अर्पित करना शुभ फलदायी होगा।

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