Budget 2026 Expectations:बजट का इंतजार, व्यापार को राहत की 'और' दरकार... बोले बजट में स्थान दो सरकार

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
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लखनऊ, अमृत विचार: रविवार को केंद्र सरकार अपना सालाना बजट पेश करेगी। वित्त मंत्री संसद में बजट रखेंगी। ऐसे में सभी को आने वाले बजट से बड़ी अपेक्षाएं हैं। व्यापारी वर्ग भी इससे अछूता नहीं है। व्यवसायियों का मानना है कि कई सेक्टर में राहत मिली जरूर है लेकिन व्यापार को पंख लगाने के लिए राहत की अभी ''और'' दरकार है। ई-कामर्स और रिटेल ट्रेड पॉलिसी की मांग पर अब तक कदम आगे नहीं बढे़ हैं। एक ट्रेड-एक टैक्स, टीडीएस दरों को सरल बनाते हुए केवल एक और पांच प्रतिशत की दो दरों की मांग, फर्नीचर ट्रेड पर कच्चा माल सस्ता किया जाने, हस्त निर्मित बेंत, बास,रस्सी फर्नीचर पर जीएसटी स्लैब 18 से 5 प्रतिशत किए जाने समेत जीएसटी पोर्टल की तकनीकी खामियों और जटिलताओं से जूझते व्यापारियों की ऐसी तमाम समस्याएं हैं जिनका वह निदान चाहते हैं। वहीं सोने चांदी के भाव में अनिश्चितता के माहौल ने सर्राफा कारोबार को झकझोर दिया है। दाम बढ़ने से छोटे ज्वेलर्स और खुदरा व्यापारी सबसे ज़्यादा प्रभावित हो रहे हैं। व्यापारियों के लिए दुघर्टना बीमा और पेंशन की मांग भी लंबित है। ईपीएस- 95पेंशन बढ़ोतरी की घोषणा की बात इस बजट में लाए जाने की मांग भी पेंशनर्स कर रहे हैं।

उम्मीदें

-बजट ऐसा हो जो आम आदमी की समझ में आए
-एक ट्रेड–एक टैक्स व्यवस्था हो लागू
-टीडीएस की केवल दो दरें
-एक कारोबार पर एक कर
-आइटमवार भिन्न-भिन्न जीएसटी दरें नहीं
-जीएसटी पोर्टल की तकनीकी खामियों से आज भी जूझ रहा व्यापारी
-छोटे व्यापारियों पर अनावश्यक पेनाल्टी एवं ब्याज का बोझ न डाला जाए।
-जीएसटी पंजीकरण सीमा बढ़े।
-फर्नीचर के लिए कच्चे माल पर कर और शुल्क में राहत
-आसान और सस्ता ऋण,
-फर्नीचर निर्माण के लिए रियायती आयात शुल्क
-छोटे फर्नीचर निर्माताओं और खुदरा विक्रेताओं के लिए 5-15 लाख रुपये तक के व्यवसाय लोन को आसान बनाना, जिसमें ब्याज दरें कम हों
-असंगठित क्षेत्र के हस्त निर्मित (हस्त निर्मित बेंत, बास,रस्सी ) फर्नीचर पर जीएसटी स्लैब 5 प्रतिशत हो
-एक ही वस्तु पर समान कर दर होने की स्थिति में केवल एक एचएसएन कोड रखा जाए।
-सोने चांदी के दाम बढ़ने से छोटे ज्वेलर्स, खुदरा व्यापारी और आमजन सबसे ज़्यादा प्रभावित
-कच्चे माल पर अधिक और तैयार माल पर कम टैक्स दर के कारण आईटीसी क्लेम फंसने से राहत की उम्मीद, ऑटोमेटिक रिफंड हो
-आईटीसी मिसमैच की नोटिस उसी माह मिले या फिर उसी वित्तीय वर्ष में
- आयकर की नई योजना के अंतर्गत, हाउसिंग लोन के ब्याज का लाभ नहीं मिलता है, आयकर की नई योजना में भी 2 लाख रुपये के ब्याज का लाभ मिले
- नेशनल फेसलेस स्कीम में सभी आयकर दाताओं को पर्सनल फिजिकल एपीयरेंस का अवसर मिलना चाहिए ताकि सर्वर, भाषा की समस्याओं एवं व्यावहारिक तौर पर केस को समझा जा सके।
-एलएलपी और पार्टनरशिप फर्म पर वर्तमान में 30 प्रतिशत की दर है। इसे कॉरपोरेट टैक्स के बराबर 22.5 होना चाहिए
-वर्तमान में सेस की दर 3 प्रतिशत है। इसे 1 फीसद किया जाना चाहिए
-आयकर की धारा 44 एडी की वर्तमान में लिमिट अभी 1.5 करोड़ है इसे 5 करोड़ की जाए
-शेयर और म्यूचुअल फंड पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन परअभी केवल एक लाख की छूट है। इसे बढ़ाकर पांच लाख किया जाए

-आयकर दाताओं को जमा किए गए कर के अनुपात में दस लाख रुपए तक जीवन एवं स्वास्थ्य बीमा दिया जाए।

व्यापारी की उधारी को बैंक की उधारी की तरह संरक्षण प्रदान मिले। उधारकर्ता की इन्वाइस का जीएसटी इनपुट वापस लेने के साथ विभाग द्वारा उसके सिबिल स्कोर यानी क्रेडिट योग्यता में भी चढ़ाया जाये जिससे व्यापारियों में जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराने के साथ बिल से ही सप्लाई करने की प्रक्रिया बढ़ जायेगी। इनपुट वापस लेने का नियम जीएसटी में लागू है।

श्याममूर्ति गुप्ता, प्रदेश अध्यक्ष उप्र सीमेंट व्यापार संघ

बजट में ईपीएस- 95पेंशन बढ़ोतरी की घोषणा हो

ईपीएस -95 राष्ट्रीय संघर्ष समिति पिछले 10 वर्षों से केंद्र के सार्वजानिक उपक्रमों, सहकारी /निजी संस्थानों के पेंशनरों की पेंशन बढ़ाने की मांग कर रही है। बार-बार आश्वासन देने के बावजूद अभी तक बजट में कोई घोषणा नहीं की गई है। इससे औसतन 1171/- मासिक पेंशन पा रहे देश के 81 लाख पेंशनर्स की आर्थिक स्थिति बदतर हो चुकी है। उन्हें कोई मेडिकल सुविधा नहीं मिल रही है। आगामी बजट में ईपीएस- 95 पेंशन 7500/- महीना एवं महंगाई भत्ते की घोषणा सरकार करे।
राजीव भटनागर, राष्ट्रीय सचिव, एनएसी

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