सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र व UP समेत 12 राज्यों के धर्मांतरण विरोधी कानूनों पर जारी किया नोटिस, 4 हफ्ते में मांगा जवाब

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Published By Deepak Mishra
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नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने धर्मांतरण रोधी कानूनों की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली 'नेशनल काउंसिल ऑफ चर्चेज इन इंडिया' (एनसीसीआई) की नयी याचिका पर सोमवार को केंद्र के साथ-साथ राजस्थान और अरुणाचल प्रदेश सहित 12 राज्यों को नोटिस जारी किया। एनसीसीआई द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा के जरिये दाखिल इस जनहित याचिका में धर्मांतरण रोधी कानूनों के क्रियान्वयन पर तत्काल रोक लगाने का अनुरोध किया गया है। 

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने एनसीसीआई की दलीलों पर संज्ञान लेते हुए केंद्र तथा 12 राज्य सरकारों से चार सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया। प्रधान न्यायाधीश ने नयी जनहित याचिका को इसी मामले में दाखिल अन्य याचिकाओं के साथ संबद्ध करने का निर्देश देते हुए कहा कि तीन न्यायाधीशों की पीठ इन सभी पर एक साथ सुनवाई करेगी। 

केंद्र सरकार का पक्ष रखने के लिए पीठ के समक्ष उपस्थित हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि राज्य के कानूनों को चुनौती देने वाली इसी तरह की याचिकाएं लंबित हैं। उन्होंने कहा, ''हमारा जवाब तैयार है और जल्द ही दाखिल किया जाएगा।'' अरोड़ा ने दलील दी कि ओडिशा और राजस्थान ने भी अपने अलग-अलग कानून बनाए हैं जिन्हें पूर्व में दाखिल याचिकाओं में चुनौती नहीं दी गई है। 

उन्होंने कहा, ''अन्य अधिनियमों में भी संशोधन किया गया है जिन्हें चुनौती नहीं दी गई है। मैं सभी स्थायी अधिवक्ताओं को नोटिस देना चाहती हूं।'' पीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा, ''नोटिस जारी करें। प्रत्येक नोटिस की एक प्रति राज्यों के महाधिवक्ताओं को भी भेजी जाए। केंद्र और 12 राज्यों की ओर से चार सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल किया जाए।

प्रतिवादी एक संयुक्त जवाबी हलफनामा दाखिल करें। मामले के महत्व के मद्देनजर इसे तीन न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।'' ईसाई निकाय का पक्ष रखने के लिए पेश हुईं अरोड़ा ने दलील दी कि कुछ राज्य कानून ऐसे हैं जो तथाकथित धर्मांतरण के खिलाफ ''सतर्कता समूहों को शिकायत करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं'', और इसलिए कई शिकायतें दर्ज की जा रही हैं। 

सॉलिसिटर जनरल ने इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि ये कानून उच्चतम न्यायालय की पांच न्यायाधीशों की पीठ के फैसले के दायरे में आते हैं। केंद्र के अलावा, पीठ ने राजस्थान, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़, अरुणाचल प्रदेश, गुजरात, झारखंड, उत्तराखंड, हरियाणा, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश को भी नोटिस जारी किए।

शीर्ष अदालत ने 16 सितंबर, 2025 को कई राज्यों द्वारा पारित धर्मांतरण रोधी कानूनों पर रोक लगाने का अनुरोध करने वाली याचिकाओं पर संबंधित राज्यों से जवाब तलब किया था। पीठ ने स्पष्ट किया था वह ऐसे कानूनों के संचालन पर रोक लगाने की प्रार्थना पर जवाब मिलने के बाद विचार करेगी। 

शीर्ष अदालत कई राज्यों द्वारा पारित धर्मांतरण रोधी कानूनों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। मामले में संवाद को सुव्यवस्थित करने के लिए शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सृष्टि को और प्रतिवादी राज्यों की ओर से अधिवक्ता रुचिरा को नोडल अधिवक्ता नियुक्त किया है।

 इससे पहले, केंद्र ने अंतरधार्मिक विवाहों के कारण धर्मांतरण को विनियमित करने वाले विवादास्पद राज्य कानूनों को चुनौती देने में कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ के गैर सरकारी संगठन 'सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस' की ओर से याचिका दाखिल करने पर सवाल उठाया था।  

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