'एक इंच जमीन भी नहीं गई' ... राहुल गांधी के बयान के बाद भाजपा ने जारी किया पूर्व आर्मी चीफ नरवणे का पुराना वीडियो

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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नई दिल्ली। लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सोमवार में खूब हंगामा देखने को मिला और अंततः कई बार के स्थगन के बाद सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।दरअसल, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष व कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने चर्चा के दौरान डोकलाम मुद्दे पर पूर्व आर्मी चीफ मनोज नरवणे की अप्रकाशित पुस्तक और एक पत्रिका में प्रकाशित आलेख का हवाला देते हुए केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर प्रहार किया।

हालांकि राहुल के बयान पर सदन में न सिर्फ राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने आपत्ति उठाई बल्कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी नियमों का हवाला देते हुए कांग्रेस नेता को नसीहत दे डाली। फिलहाल सदन में हंगामे के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पूर्व आर्मी चीफ मनोज नरवणे के एक वीडियो क्लिप शेयर किया है। यह वीडियो उस समय का है, जब डोकलाम विवाद हुआ था। इस वीडियो में वह बता रहे हैं कि भारत की जमीन सुरक्षित है और कोई भी इलाका नहीं गया।

पूर्व आर्मी चीफ मनोज नरवणे ने क्या कहा था?

भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे ने लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) को लेकर पहले साफ-साफ समझाया था कि भारत ने किसी भी तरह का क्षेत्रीय नुकसान नहीं उठाया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, ‘एक इंच भी जमीन नहीं खोई गई है।’

नरवणे ने बताया था कि हालात ठीक वैसे ही हैं, जैसे इस पूरी स्थिति के शुरू होने से पहले थे। उन्होंने यह भी बताया कि जो समझौता हुआ है, वह आपसी और समान सुरक्षा के सिद्धांत पर आधारित है। उनके अनुसार डिसएंगेजमेंट की प्रक्रिया को इसी व्यापक नजरिए से देखा जाना चाहिए ताकि दोनों देशों के हित में स्थिरता बनी रहे।

पूर्व सेना प्रमुख ने कहा था कि यह कदम दोनों देशों के लिए लाभकारी है क्योंकि इससे लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर शांति और स्थिरता बनी रहेगी और भविष्य में झड़पों की संभावना कम होगी। उन्होंने जोर देकर कहा था कि सीमा पर शांति बनाए रखना भारत और चीन दोनों के लिए अत्यंत आवश्यक है।

नरवणे ने साफ किया था कि यह मुद्दा चरणबद्ध तरीके से हल किया जा रहा है, जहां पहला कदम डिसएंगेजमेंट था और इसके बाद वार्ताएं जारी रहेंगी। इन वार्ताओं से दोनों पक्षों के बीच मतभेद धीरे-धीरे कम होंगे और एक ऐसा समाधान निकलेगा, जो दोनों देशों के लिए स्वीकार्य होगा। उनका मानना था कि कोई भी समाधान तभी सफल होगा, जब वह दोनों देशों की सुरक्षा चिंताओं को समान रूप से ध्यान में रखे।

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