Bharat Taxi Launch: अमित शाह लॉन्च करेंगे देश की पहली 'भारत टैक्सी', यात्रियों की सुविधा से लेकर क्या है फायदें, जानें
दिल्ली। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह गुरुवार को देश की पहली सहकारिता-क्षेत्र की टैक्सी सेवा 'भारत टैक्सी' शुरू करेंगे। शाह ने सोशल मीडिया एक्स पर इस पहल का महत्व बताते हुए कहा कि यह मंच कई लोगों को साथ आकर, थोड़ा-थोड़ा निवेश करके कुछ बड़ा बनाने में मदद करेगा।
उन्होंने आज दिन को टैक्सी चालकों के लिए अहम बताते हुए कहा कि देश की पहली सहकारिता-क्षेत्र की टैक्सी सेवा 'भारत टैक्सी' का नयी दिल्ली में उद्घाटन उनके लिये एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उन्होंने कहा कि 'भारत टैक्सी' के जरिये टैक्सी चालक न सिर्फ ज्यादा मुनाफा कमा पाएंगे, बल्कि अपनी सेवा के मालिक भी बन जायेंगे।
सहकारिता मंत्रालय ने इस सेवा की जानकारी देते हुए कहा, "गतिशीलता (मोबिलिटी) क्षेत्र में एक परिवर्तनकारी पहल के रूप में परिकल्पित भारत टैक्सी में, 'सारथी' कहे जाने वाले ड्राइवरों को स्वामित्व, संचालन और मूल्य सृजन के केंद्र में रखा गया है। इससे उन्हें शोषणकारी एग्रीगेटर-आधारित प्रणालियों से मुक्ति मिलेगी।"
उल्लेखनीय है कि श्री शाह भारत टैक्सी के लॉन्च के दौरान छह सारथियों (टैक्सी चालकों) को सहकारिता-यातायात इकोसिस्टम में उनके योगदान के लिये सम्मानित भी करेंगे। प्रत्येक सम्मानित चालक को पांच लाख का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा और पांच लाख का पारिवारिक स्वास्थ्य बीमा प्रदान किया जाएगा।
इस अवसर पर परिचालन एकीकरण, डिजिटल सशक्तिकरण, सुरक्षा और सेवा वितरण को सुदृढ़ करने के लिए प्रमुख सार्वजनिक एवं निजी हितधारकों के साथ नौ समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का आदान-प्रदान किया जाएगा। बहु राज्य सहकारी समितियां अधिनियम 2002 के तहत पंजीकृत भारत टैक्सी की स्थापना छह जून, 2025 को हुई थी। यह शून्य कमीशन और सर्ज-मुक्त मॉडल पर काम करती है, जिसमें टैक्सी चालकों को सीधे मुनाफ़ा बांटा जाता है। यह विदेशी निवेश पर आधारित एग्रीगेटर-प्लेटफ़ॉर्म का एक स्वदेशी विकल्प पेश करती है।
महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए, "बाइक दीदी" जैसी पहल शुरू की गयी हैं, जिसमें अब तक 150 से ज़्यादा महिला ड्राइवर भारत टैक्सी से जुड़ चुकी हैं। भारत टैक्सी दुनिया का पहला और सबसे बड़ा सहकारिता-आधारित टैक्सी मंच और दुनिया का सबसे बड़ा चालक-संचालित मंच बनकर उभरा है। इस मंच पर करीब चार लाख ड्राइवर और 10 लाख से ज़्यादा मुसाफिर पंजीकृत हो चुके हैं, जबकि अब तक टैक्सी चालकों को सीधे करीब 10 करोड़ रुपये बांटे जा चुके हैं।
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