जंगल की दुनिया : ब्लू व्हिसलिंग थ्रश: पहाड़ों में बसा नीला सौंदर्य

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Published By Anjali Singh
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ब्लू व्हिसलिंग थ्रश चंडीगढ़ क्षेत्र के जंगलों और वन इलाकों में पाया जाने वाला एक अत्यंत आम, लेकिन प्रभावशाली पक्षी है। सुबह और शाम के समय इसकी तेज, मानव जैसी सीटी या सींख जैसी आवाज दूर-दूर तक सुनाई देती है, जिससे यह अपनी उपस्थिति आसानी से दर्ज करा देता है। यद्यपि यह मूल रूप से एक पर्वतीय पक्षी है, लेकिन शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी में बसे चंडीगढ़ और आसपास के क्षेत्रों का प्राकृतिक वातावरण इसके लिए अत्यंत अनुकूल है।

यह पक्षी गहरे नीले-काले रंग का होता है, जिसके सिर और शरीर पर चांदी जैसे नीले रंग की चमकदार धारियां दिखाई देती हैं। धूप पड़ने पर इसका रंग और भी अधिक चमकीला प्रतीत होता है। इसकी सबसे अलग पहचान इसकी चमकीली पीली चोंच है, जो इसके गहरे शरीर रंग के साथ तीव्र विरोधाभास बनाती है। ब्लू व्हिसलिंग थ्रश का आकार लगभग 31 से 35 सेंटीमीटर तक होता है और इसकी मजबूत काया इसे अन्य थ्रश प्रजातियों से अलग बनाती है।

अंतर्राज्यीय चंडीगढ़ क्षेत्र (आईएससीआर) में इसे बहुत आम पक्षी माना जाता है। इसका प्रमुख कारण यह है कि यह क्षेत्र चारों ओर से शिवालिक पहाड़ियों से घिरा हुआ है और यहां घने वन, प्राकृतिक नाले, झीलें और हरित पट्टियां मौजूद हैं। सुखना वन अभ्यारण्य, सारंगपुर वनस्पति उद्यान, मोरनी हिल्स और कसौली क्षेत्र इस पक्षी के प्रमुख आवास माने जाते हैं। ब्लू व्हिसलिंग थ्रश का भोजन मुख्यतः कीड़े-मकोड़े, केंचुए, घोंघे, छोटे केकड़े और अन्य जलीय जीव होते हैं।

इसे अक्सर पानी के किनारे चट्टानों पर उछलते-कूदते भोजन खोजते देखा जा सकता है। प्रजनन काल में यह चट्टानों की दरारों, नालों के पास या पुराने ढांचों में घोंसला बनाता है। ब्लू व्हिसलिंग थ्रश न केवल चंडीगढ़ क्षेत्र की जैव विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा है, बल्कि यह स्वच्छ और संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र का भी संकेतक माना जाता है।