क्या भारत रूस से तेल खरीदना बंद करेगा? ट्रंप के दावे पर MEA ने दिया साफ जवाब

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
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नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूएस-इंडिया ट्रेड डील के ऐलान के दौरान बड़ा दावा किया था कि भारत अब रूस से कच्चा तेल खरीदना पूरी तरह बंद कर देगा और अमेरिका (या वेनेजुएला) से ज्यादा तेल खरीदेगा। इस दावे के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट रुख दोहराया है। भारत की ऊर्जा सुरक्षा 140 करोड़ नागरिकों के लिए सबसे ऊपर है, और तेल खरीद के फैसले बाजार की स्थिति तथा राष्ट्रीय हित के आधार पर ही होंगे।

MEA के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "भारत की ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना हमारी रणनीति का मूल आधार है। सरकार ने कई बार सार्वजनिक रूप से कहा है कि 140 करोड़ भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। बाजार की परिस्थितियों और बदलते वैश्विक परिदृश्य के अनुसार ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना हमारी मुख्य नीति है। सभी फैसले इसी दृष्टिकोण से लिए गए हैं और आगे भी लिए जाएंगे।"

ट्रंप ने व्हाइट हाउस के एक कार्यकारी आदेश में दावा किया था कि भारत ने रूस से सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से तेल खरीद बंद करने की प्रतिबद्धता जताई है। इसके बदले अमेरिका ने भारत पर लगाए गए 25% अतिरिक्त टैरिफ को हटाने की घोषणा की थी। ट्रंप ने कहा था कि पीएम मोदी ने रूस से तेल खरीद बंद करने और अमेरिका से ज्यादा खरीदने पर सहमति जताई है, जिससे यूक्रेन युद्ध जल्द खत्म हो सकता है।

हालांकि, भारत ने इस दावे की न तो पुष्टि की है और न ही खंडन किया, बल्कि पुराने रुख को दोहराया। MEA ने जोर दिया कि ऊर्जा खरीद किसी बाहरी दबाव से नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आवश्यकताओं से तय होती है। अमेरिका का आरोप है कि रूस तेल से मिले पैसे का इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध के लिए करता है, जबकि रूस इसे नकारता रहा है।

क्रेमलिन की प्रतिक्रिया

रूसी राष्ट्रपति के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि भारत जहां से चाहे तेल खरीद सकता है। रूस इस बात से वाकिफ है कि वह भारत का एकमात्र आपूर्तिकर्ता नहीं है। भारत हमेशा से कई देशों से तेल खरीदता रहा है, इसलिए इसमें कुछ नया नहीं है।

यह मुद्दा यूएस-इंडिया ट्रेड समझौते के बीच आया है, जहां अमेरिका ने भारत पर दबाव बनाया था। लेकिन भारत ने स्पष्ट किया कि उसकी ऊर्जा नीति स्वतंत्र और व्यावहारिक रहेगी – कोई अचानक बदलाव नहीं होगा।

भारत विविध स्रोतों से खरीद जारी रखेगा, जिसमें रूस भी शामिल रहेगा, जब तक बाजार और हित अनुकूल हों।

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