बिजली बिल में होगी 30% तक की बढ़ोतरी! फिर भी यूपी सरकार ने किया रोजगार और MSME को लेकर बड़ा दावा
आरडीएसएस व स्मार्ट मीटरिंग से डिस्कॉम की कार्यक्षमता में बढ़ोतरी
लखनऊ, अमृत विचार: यूपीपीसीएल ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए बिजली की दरों में 30 फीसद तक की वृद्धि का प्रस्ताव दिया है। जबकि सरकार का दावा है कि प्रदेश में बिजली संकट अब बीते दौर की बात हो गई है।
योगी सरकार का मानना है कि बेहतर बिजली आपूर्ति के चलते प्रदेश में औद्योगिक निवेश बढ़ा है, एमएसएमई सेक्टर को संबल मिला है और रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2022-23 में प्रदेश की बिजली की कुल आवश्यकता 1 लाख 44 हजार 251 मिलियन यूनिट थी।
योगी सरकार ने बिजली की मांग व आपूर्ति के अंतर को समाप्त करने के लिए नीतियों और प्रबंधन सुधारों का जो प्रयास किया, उसका असर दिखने लगा। वित्त वर्ष 2023-24 में आपूर्ति 1 लाख 48 हजार 287 मिलियन यूनिट तक पहुंच गई, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 1 लाख 64 हजार 786 मिलियन यूनिट हो गई। चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में दिसंबर 2025 तक की स्थिति में व्यापक सुधार हुआ। इस अवधि में बिजली की कमी व्यावहारिक रूप से लगभग खत्म हो गई है। योगी सरकार ने बिजली उत्पादन और आपूर्ति के साथ-साथ पारेषण व वितरण व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया।
यूपी विद्युत नियामक आयोग की मंजूरी से तय होगी बढ़ोत्तरी
यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) ने बढ़ते राजस्व घाटे का हवाला देते हुए बिजली दरों में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है। हालांकि अंतिम दरों का निर्णय यूपी विद्युत नियामक आयोग की मंजूरी के बाद ही होगा। यूपीपीसीएल ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए बिजली की दरों में 30% तक की वृद्धि का प्रस्ताव दिया है। यह बढ़ोतरी पिछले 5 वर्षों से नहीं हुई है, जिसके कारण राजस्व घाटा बढ़ गया है। प्रस्ताव के मंजूर होने पर, ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली की दरें 13 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंच सकती हैं, जिसमें फिक्स चार्ज में भी वृद्धि शामिल है। यूपी में अप्रैल 2025 से ही 1.24% का एक नया फ्यूल सरचार्ज जोड़ा जा रहा है, जिससे बिजली बिल पहले ही थोड़े बढ़ चुके हैं। यदि राज्य विद्युत नियामक आयोग इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है, तो उपभोक्ताओं की जेब पर बड़ा बोझ पड़ सकता है।
