Bareilly: दावे चकाचक लेकिन सड़कों पर कूड़ा और गंदगी के अंबार

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। नगर निगम का दावा है कि स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 की तैयारियों को लेकर शहर पूरी तरह सक्रिय है, लेकिन वास्तविक स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत नजर आती है। कागजों में जहां सफाई अभियान और नालों की सफाई का दावा किया जा रहा है, वहीं शहर के प्रमुख मार्गों और वार्डों में गंदगी और पानी निकासी की खराब स्थिति ने चिंता पैदा कर दी है। आगामी सर्वेक्षण में रैंकिंग में गिरावट की आंशका बढ़ रही है। खासकर पुराना शहर, जगतपुर, कटरा चांद खा, हजियापुर जैसे कई इलाकों में यह समस्या और गंभीर है।

दरअसल, इसी महीने केंद्रीय मंत्रालय की टीम किसी भी दिन बरेली आ सकती है। ऐसे में स्वच्छता सर्वेक्षण में बेहतर रैंकिंग हासिल करने के लिए नगर निगम की ओर से दावा किया जा रहा है कि तैयारी जोरों पर है। सड़क और नालों की सफाई, कचरा हटाने व टूटी स्ट्रीट लाइट बदलने जैसे कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। नगर आयुक्त भी स्वयं वार्डों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहे हैं और कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

निगम ने खाली पड़े प्लॉटों से कचरा हटाने और डिवाइडरों पर रंग-रोगन कराने का काम भी शुरू किया है। उसके बावजूद शहर में सार्वजनिक जगहों पर कूड़ा और गलियों में भरा गंदा पानी की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। इतना ही नहीं सिल्ट भरे नालों के चलते गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है। इसकी वजह से बेहतर रैंकिंग हासिल करना मुश्किल नजर आता है। कहा जा रहा है कि यह स्थिति स्वच्छ सर्वेक्षण के मानकों के विपरीत है, जहां वायु गुणवत्ता के साथ जल निकासी व्यवस्था का भी कड़ा मूल्यांकन किया जाता है। इस मोर्चे पर नगर निगम की विफलता आगामी रैंकिंग में भारी पड़ सकती है। इधर, नागरिकों का कहना है कि सिर्फ दिखावे की सफाई और कागजी दावों से नहीं, बल्कि नियमित, सतत सफाई और जनता की भागीदारी से ही शहर की स्वच्छता में वास्तविक परिवर्तन आ सकता है।

स्वच्छता में बरेली की सकारात्मक छलांग
रैकिंग की बात करें तो नगर निगम ने पिछले तीन वर्षों में स्वच्छता सर्वेक्षण में लगातार सुधार दर्ज किया है। वर्ष 2022 में 137वीं रैंक थी, जो 2023 में 80वीं और 2024 में देश में 20वीं रैंक तक पहुंच गई है, यह रैंकिंग डोर-टू-डोर कचरा संग्रह, नालों की सफाई और बेहतर रख‑रखाव के प्रयासों का परिणाम है। नगर आयुक्त संजीव मौर्य का कहना है कि इस प्रगति को और आगे बढ़ाने के लिए निगम ने अपने सभी जोनों के सफाई निरीक्षक, सफाई नायक, सफाई मित्र और कूड़ा संग्रह कर्मियों को प्रशिक्षण दे रहा है। कामकाज सुधारने के लिए समय-समय पर कार्यशालाओं के माध्यम से कर्मियों को उनके दायित्व और जिम्मेदारियों की स्पष्ट जानकारी दी जा रही है। यह पहल शहर को ओडीएफ और गार्बेज फ्री सिटी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, ताकि बरेली की स्वच्छता सर्वेक्षण में रैंकिंग और बेहतर हो सके।

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