UP: करोड़ों रुपये खर्च, फाइलों में हर घर जल, हकीकत में सूखे नल

Amrit Vichar Network
Published By Monis Khan
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लखीमपुर खीरी, अमृत विचार। केंद्र और प्रदेश सरकार की ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई जल जीवन मिशन योजना का जिले में हाल बेहद खराब है। ब्लाक फूलबेहड़, निघासन और पलिया क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों में यह योजना पूरी तरह से फेल साबित हो रही है।

करोड़ों रुपये की लागत से चल रही यह महत्वाकांक्षी योजना जमीन पर नहीं, बल्कि केवल कागजों और फाइलों में ही दौड़ती नजर आ रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में कहीं पाइप लाइने बिछा दी गईं, कहीं टोटियां लगा दी गईं, लेकिन आज तक उनमें पानी की एक बूंद भी नहीं पहुंच सकी।

निघासन विकास खंड की ग्राम पंचायत भेड़ौरी के मजरा तकियापुरवा में बनी पेयजल की टंकी तो आठ साल से कागजों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध करा रही है, लेकिन हकीकत तो यह है कि आठ सालों में लगाई गई टोंटियों से एक बूंद पानी नहीं टपका है। बताते हैं कि तकियापुरवा समेत कई गांवों में विभागीय रिकॉर्ड में नियमित जलापूर्ति दर्शा दी गई है, जबकि हकीकत यह है कि नल सूखे पड़े हैं और ग्रामीण पानी के लिए हैंडपंप, तालाब और निजी बोरिंग पर निर्भर हैं।

गर्मी के मौसम में हालात और भी भयावह हो जाते हैं। हैंडपंप सूखने लगते हैं और महिलाओं व बच्चों को दूर से पानी ढोना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि योजना के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति और बंदरबांट हुई है, जबकि उनकी प्यास आज भी बुझ नहीं सकी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना काम पूरा किए ही ठेकेदारों को भुगतान कर दिया गया और अधिकारियों ने आंख मूंदकर कागजों में योजना को सफल घोषित कर दिया।

शिकायतें करने पर सिर्फ आश्वासन मिलते हैं, लेकिन न तो पेयजल आपूर्ति शुरू होती है और न ही जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई होती है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि सरकार की जिस योजना को ग्रामीण जीवन में बदलाव की उम्मीद माना गया था, वही योजना आज भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ती दिख रही है। जल जीवन मिशन के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि ग्रामीण बूंद-बूंद पानी को तरसें, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषी ठेकेदारों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और वास्तविक रूप से हर घर तक शुद्ध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि जल जीवन मिशन सिर्फ कागजो की योजना बनकर न रह जाए।

पाइप लाइनों के लीक होने से नहीं हो रही आपूर्ति
गांव तकियापुरवा में बनाई गई जल जीवन मिशन की पेयजल टंकी से तकियापुरवा के अलावा कस्बा बेलरायां को भी पेयजल आपूर्ति के लिए पाइप लाइनें बिछाई गईं। लोगों के घरों और चौराहों पर कनेक्शन देकर टोटियां लगा दी गईं थीं, लेकिन यह टोटिया सरकारी व्यवस्था पर सवाल उठा रही हैं। आज तक इन टोटियों से एक बूंद पानी तक नहीं टपका है। सूत्र बताते हैं कि डाली गई पाइप लाइन काफी घटिया किस्म की थी। इससे वह जगह-जगह से लीक हो रही है। पानी की सप्लाई शुरू करने पर लीकेज के कारण पानी गांव में भरने लगता है। इस वजह से पानी की सप्लाई नहीं दी जा रही है। वहीं यहां तैनात कर्मचारियों को भी पिछले कई सालों से वेतन का भुगतान भी नहीं किया गया है।

बेलरायां नावेद हुसैन ने बताया कि जब से पानी की टंकी बनी है, तब से लेकर आज तक पानी नहीं आया है। हम लोग आर्सेनिक युक्त पानी पीने को मजबूर है। योजना सा सही क्रियावन्यन न होने से करोड़ों रुपये व्यर्थ हो रहे हैं। 

क्षेत्र पंचायत सदस्य सुरेश कुमार ने बताया कि ग्राम पंचायत में टोंटिया लगा दी गईं, लेकिन पाइप लाइन कई जगहों से लीकेज है। इस वजह से लोगों को शुद्ध पेयजल नहीं मिल पा रहा है। प्रशासन जांच कराकर कार्रवाई करे। 

बेलरायां के शिव कुमार ने बताया कि  यहां का पानी बहुत खराब है। उम्मीद थी कि शुद्ध पेयजल मिलेगा, लेकिन पानी की सप्लाई शुरू नहीं पाई है। हम लोग अपने निजी हैंडपंपों पर ही निर्भर हैं और आर्सेनिक युक्त पानी पी रहे हैं।

करोड़ों खर्च घरों में नहीं पहुंचा स्वच्छ पेयजल
ग्राम पंचायत फूलबेहड़ में वर्ष 2014-15 में उत्तर प्रदेश जल निगम ने 600 किलोलीटर क्षमता की पाइप पेयजल टंकी का निर्माण कराया था। उस समय यह योजना फूलबेहड़ ग्रामीण पाइपलाइन पेयजल योजना के नाम से जानी जाती थी, जिसे बाद में जल जीवन मिशन में शामिल कर दिया गया। टंकी से जुड़े कई गांवों तक पाइ पलाइन तो बिछा दी गई, लेकिन शुद्ध पेयजल की आपूर्ति आज तक कागजों से बाहर नहीं निकल सकी।

ग्रामीणों का कहना है कि बीते करीब एक वर्ष से उन्हें शुद्ध पेयजल नहीं मिल रहा है। लगभग 10 से 12 हजार की आबादी वाली इस ग्राम पंचायत के लोग पानी के लिए परेशान हैं, जबकि यह पंचायत विकासखंड मुख्यालय से सटी हुई है। ऐसे में विकास के बड़े-बड़े दावों की सच्चाई खुद-ब-खुद सामने आ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस उद्देश्य से यह पानी की टंकी बनाई गई थी, वह उद्देश्य आज भी अधूरा है। जनता के टैक्स के पैसों से कराए गए करोड़ों के निर्माण आखिर किसके काम आ रहे हैं, यह बड़ा सवाल बन गया है।

फूलबेहड़ पाइप टंकी की जेई नेहा पांडेय ने बताया कि यह योजना एक फर्म को दी गई है और वर्तमान में डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) का सर्वे चल रहा है। उन्होंने बताया कि पहले यह टंकी जल निगम के तहत थी, जिसे संचालन के लिए ग्राम पंचायत को सौंप दिया गया था। डीपीआर पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। सबसे बड़ा सवाल यह है कि विकासखंड मुख्यालय से चंद कदम दूर स्थित ग्राम पंचायत में आज भी डीपीआर सर्वे ही चल रहा है, जबकि ग्रामीण वर्षों से पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। आखिर कब तक जल जीवन मिशन केवल फाइलों और सर्वे तक सीमित रहेगा और कब ग्रामीणों की प्यास बुझेगी? फूलबेहड निवासी धीरज ने बताया कि पिछले वर्ष करीब मार्च अप्रैल से पानी नहीं आ रहा है। वहीं फूलबेहड़ निवासी सुखवीर सिंह ने बताया कि पानी की टंकी करीब एक साल से बंद पड़ी है

कोठिया में दो टंकियां, फिर भी पानी को तरस रहे लोग
मझगई। ब्लॉक पलिया की ग्राम पंचायत कोठिया में पेयजल व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। हैरानी की बात यह है कि गांव में दो-दो पानी की टंकियां बनी होने के बावजूद लोगों को पीने का पानी नसीब नहीं हो रहा। ग्राम प्रधान रमाशंकर जाटव ने बताया कि गांव में बनी नई पानी की टंकी को पूरा हुए करीब दो साल हो चुके हैं, लेकिन आज तक उस पर सौर ऊर्जा की प्लेटें नहीं लग सकीं। इसके चलते टंकी से जलापूर्ति शुरू ही नहीं हो पाई। वहीं, बोरवेल का ढक्कन चोर उड़ा ले गए, जिससे व्यवस्था और भी बदहाल हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार संबंधित विभागों और अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। 

मजबूरन महिलाएं और बच्चे दूर के हैंडपंपों और निजी स्रोतों पर निर्भर हैं।ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल सौर प्लेटें लगवाने, बोरवेल की मरम्मत कराने और नियमित जलापूर्ति शुरू कराने की मांग की है। यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो ग्रामीण आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं। सीडीओ अभिषेक कुमार ने बताया कि बंद पड़ी पेयजल टंकियों की जांच कराई जाएगी। कमियों को दूर कराकर पेयजल सप्लाई को सुचारू कराया जाएगा। जांच में जो भी दोषी होगा। उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

 

 

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