UP Police : दबाव की परिस्थितियों से निपटने के लिये चयनित पुलिसकर्मियों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
On

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में दबाव की परिस्थितियों से बेहतर ढंग से निपटने और जनता के साथ बर्ताव को बेहतर बनाने के लिये राज्य पुलिस ने एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। 'सक्षम पुलिसिंग' नाम का यह तीन-दिवसीय क्षमता-निर्माण कार्यक्रम पुलिस मुख्यालय में एक प्रायोगिक परियोजना के तौर पर पुलिस प्रशिक्षण निदेशालय द्वारा टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान समविश्वविद्यालय के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।

इसमें 40 चुनिंदा पुलिसकर्मियों के एक समूह को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए कहा कि संस्थागत विश्वसनीयता और व्यक्तिगत प्रभावशीलता के लिए लगातार प्रशिक्षण बहुत ज़रूरी है।

पुलिसिंग में आचरण और सोच की भूमिका पर बल देते हुए पुलिस महानिदेशक ने कहा, ''तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ, रवैया और व्यवहार यह तय करता है कि एक अधिकारी क्षेत्र में कैसा प्रदर्शन करता है। प्रभावी मौखिक और गैर-मौखिक संचार क्षमता खासतौर से अहम है क्योंकि जनता के साथ संवाद का तरीका सीधे तौर पर पुलिस की छवि को आकार देता है।''

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रतिभागियों के चयन के बारे में कृष्ण ने कहा, ''लगभग चार लाख पुलिसकर्मियों में से 40 को इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिये चुना गया है। उन्हें इसे अपना सौभाग्य समझना चाहिये। उन्हें इसे एक रूटीन कार्य की तरह लेने के बजाय ईमानदारी, खुलेपन और सकारात्मक सोच के साथ इसमें भाग लेना चाहिये।'' उन्होंने कहा, ''प्रशिक्षण व्यक्तिगत और पेशेवर दोनों ही तरह की उन्नति की नींव है। दुनिया भर में प्रमुख संस्थानों और सुरक्षा बलों की सफलता उनके प्रशिक्षण की गुणवत्ता और निरंतरता पर निर्भर करती है।''

टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान समविश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर बद्री नारायण तिवारी ने कहा कि पुलिसिंग के लिए भावनात्मक लचीलेपन और सामाजिक संवेदनशीलता जरूरी होती है। उन्होंने कहा, ''पुलिसकर्मी लगातार दबाव और जनता की निगरानी में काम करते हैं। यह कार्यक्रम उन्हें संरचित व्यवहार प्रशिक्षण के माध्यम से संतुलन, सहानुभूति और प्रभावशीलता विकसित करने में मदद करने के लिए डिजाइन किया गया है।''

पुलिस प्रशिक्षण महानिदेशक राजीव सभरवाल ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य पुलिसकर्मियों को समकालीन पुलिसिंग की मांगों के अनुरूप बनाना है। उन्होंने कहा, ''यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आज की चुनौतियों के हिसाब से व्यवहार, बातचीत के तरीके और पेशेवराना काबिलियत पर केंद्रित है।'' पुलिस अधिकारियों ने कहा कि इस पहल से जमीनी स्तर पर व्यवहार में सुधार होने, लोगों का भरोसा मजबूत होने और पुलिस बल की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है। 

संबंधित समाचार