अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर बोले योगी: हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं लिख सकता

Amrit Vichar Network
Published By Virendra Pandey
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लखनऊ, अमृत विचार : उत्तर प्रदेश विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानून-व्यवस्था, धार्मिक परंपराओं और विपक्ष के रुख को लेकर तीखे बयान दिए। प्रयागराज में कुंभ मेले के दौरान हुई घटना पर बोलते हुए कहा कि हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं हो सकता और कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। विधानसभा में बोलते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि चार पीठों की परंपरा और वेदों की मर्यादा निर्धारित है, जिसे आदि जगद्गुरु आदि शंकराचार्य ने स्थापित किया था। नियमों का उल्लंघन स्वीकार नहीं किया जाएगा। 

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि धार्मिक आयोजनों में व्यवस्था और सुरक्षा सर्वोपरि है। जहां से श्रद्धालु स्नान कर बाहर निकल रहे हों, वहां कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति ऐसा कदम नहीं उठा सकता जिससे भगदड़ की स्थिति बने। श्रद्धालुओं की जान से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता। उन्होंने दोहराया कि सरकार कानून का पालन करना और करवाना दोनों जानती है। उन्होने विपक्ष पर वातावरण खराब करने और लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार पारदर्शी व्यवस्था लागू करना चाहती है तो उसमें बाधा नहीं डाली जानी चाहिए। समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब उनको शंकराचार्य कहा जाता था, तब पूर्व में आपकी सरकार के दौरान वाराणसी में उनके साथ दुर्व्यवहार क्यों हुआ था।

 दरअसल प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में मौनी अमावस्या के अवसर पर पालकी पर बैठकर संगम स्नान करने जा रहे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को रोके जाने पर हंगामा खड़ा हो गया था। शंकराचार्य के समर्थकों ने इस मामले का विरोध शुरू कर दिया। इसके बाद पुलिस के आलाधिकारियों के साथ धक्कामुक्की होने लगी। संगम तट पर करीब तीन घंटे तक खींचतान, धक्कामुक्की और हो-हल्ला चलता रहा। इसके बाद भी पुलिस-प्रशासन नहीं माना। इसके बाद शंकराचार्य बिना स्नान के वापस लौट गए थे।

इससे पहले उत्तर प्रदेश विधानमंडल के बजट सत्र (वित्तीय वर्ष 2026-27) में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा का जवाब देते हुए कानून-व्यवस्था, विकास, महिला सुरक्षा और प्रदेश की बदली छवि पर विस्तार से सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने दोहराया कि यह कर्फ्यू से कानून तक, समस्या से समाधान तक और अव्यवस्था से सुशासन तक की यात्रा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि "आज नई परिभाषा के साथ उत्तर प्रदेश आगे बढ़ रहा है।" उन्होंने 2017 से पहले की स्थिति का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उस समय सत्ता के संरक्षण में गुंडे और माफिया पनप रहे थे। अपराधी, अपराधी होता है। हमारी सरकार ने पहले दिन 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई थी और आज भी उसी पर कायम है। 

योगी ने कहा कि पहले कानून चंद हाथों की जागीर बन चुका था, कर्फ्यू और दंगे आम बात थे तथा पर्व-त्योहार आशंका के पर्याय बन गए थे। पहले पुलिस का मनोबल टूटा हुआ था, न बेटी सुरक्षित थी न व्यापारी। आज यूपी उपद्रव नहीं, उत्सव प्रदेश है। उन्होंने दावा किया कि 2017 के बाद से प्रदेश में कोई बड़ा सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ और आज भय नहीं, आस्था का वातावरण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है। 2 लाख से अधिक पुलिस भर्तियों में 20 प्रतिशत महिलाओं को स्थान दिया गया है और वर्तमान में प्रदेश में 44 हजार से अधिक महिला पुलिसकर्मी कार्यरत हैं। पुलिस की प्रशिक्षण क्षमता को भी कई गुना बढ़ाया गया है। फॉरेंसिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि पहले प्रदेश में दो-तीन फॉरेंसिक लैब थीं, जबकि अब 12 लैब कार्यरत हैं। लखनऊ में उत्तर प्रदेश स्टेट फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट की स्थापना की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति आयोग के आंकड़ों के अनुसार पिछले आठ वर्षों में 6 करोड़ से अधिक लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर आए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका अर्थ यह नहीं है कि उन्हें सरकारी योजनाओं से वंचित किया जाएगा। राशन, स्वास्थ्य और अन्य सभी सुविधाएं यथावत मिलती रहेंगी। आर्थिक प्रगति पर बोलते हुए योगी ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश 'बीमारू राज्य' नहीं है, बल्कि 'टीटीटी' (टेक्नोलॉजी, ट्रस्ट और ट्रांसफॉर्मेशन) का प्रतीक बन चुका है। प्रयागराज की त्रिवेणी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अब पूरा प्रदेश विकास की नई त्रिवेणी का प्रतिनिधित्व कर रहा है।

धार्मिक आयोजनों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 2013 के कुंभ में जहां 12 करोड़ श्रद्धालु आए थे, वहीं इस बार के माघ मेले में 21 करोड़ श्रद्धालुओं ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 'टेंपल इकोनॉमी' भी तेजी से बढ़ रही है। अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर तुष्टिकरण और विभाजन की राजनीति का आरोप लगाया और कहा कि सरकार की यात्रा सत्ता प्राप्ति की होड़ नहीं, बल्कि सुशासन और विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने की यात्रा है। इससे पहले मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यपाल आनंदीबेन पटेल पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत सदन में आई थीं और यह बात सभी को मालूम थी। इसके बावजूद विपक्ष का रवैया निंदनीय रहा। उन्होंने कहा कि राज्यपाल एक मातृशक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं और उनके प्रति असम्मानजनक व्यवहार पूरे सदन के लिए उचित नहीं था। योगी ने विपक्ष के आचरण पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह के व्यवहार से उत्तर प्रदेश की छवि प्रभावित होती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि विपक्ष के कुछ नेताओं के बीच आपसी मतभेद भी सार्वजनिक रूप से नजर आ रहे हैं। 

उन्होंने कहा कि पिछले नौ वर्षों में सदन की कार्यवाही बहुत कम ही बाधित हुई है और यह सकारात्मक राजनीति का परिणाम है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि प्रदेश में अब संगठित अपराध पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहली बार आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट पेश कर पारदर्शिता की दिशा में कदम बढ़ाया है, जो प्रदेश की विकास यात्रा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि कभी उत्तर प्रदेश को 'बीमारू राज्य' कहा जाता था और यहां के युवाओं को संदेह की नजर से देखा जाता था, लेकिन अब प्रदेश ने अपनी अलग पहचान बनाई है। सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य अपनी पहचान के लिए मोहताज नहीं रह सकता। मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति आयोग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 6 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर आए हैं। राशन और स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं पूर्ववत मिल रही हैं और सरकार सुविधाओं में कटौती नहीं बल्कि विस्तार कर रही है। उन्होंने कहा कि यह नौ वर्षों की यात्रा 'कर्फ्यू से कानून तक', 'समस्या से समाधान तक' और 'अव्यवस्था से सुशासन तक' की यात्रा है। उत्तर प्रदेश पहले से ही त्रिवेणी के लिए विख्यात रहा है और अब विकास की नई त्रिवेणी के साथ आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि आज उत्तर प्रदेश देश की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और विकास की दिशा में निरंतर अग्रसर है। 

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