स्ट्रेस और डायबिटीज बन रहे फैटी लीवर की बड़ी वजह... देश में बढ़ता जा रहा खतरा, 40 प्रतिशत युवा बन रहे शिकार
लखनऊ, अमृत विचार : देश में फैटी लिवर की समस्या तेजी से गंभीर रूप ले रही है। Council of Scientific and Industrial Research (सीएसआईआर) के अध्ययन ‘फिनोम इंडिया कोहोर्ट’ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। देश के लगभग 40 प्रतिशत वयस्क मेटाबोलिक डिसफंक्शन एसोसिएटेड स्टीएटोटिक लिवर डिजीज (एमएएसएलडी) से प्रभावित हो सकते हैं। यह बीमारी मुख्य रूप से मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और बढ़ते तनाव से जुड़ी मानी जा रही है। देशभर में 10 हजार से अधिक वयस्कों पर किए गए इस पैन-इंडिया अध्ययन में पाया गया कि चार में से एक से अधिक व्यक्ति के लिवर में असामान्य रूप से वसा जमा हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार यह रोग लंबे समय तक बिना लक्षण के बढ़ता है, इसलिए इसे ‘साइलेंट क्राइसिस’ भी कहा जा रहा है।
अध्ययन में यह भी सामने आया कि एमएएसएलडी से ग्रस्त 4.1 प्रतिशत मरीजों में लिवर में स्कारिंग (दाग) पाई गई, जो आगे चलकर सिरोसिस और गंभीर लिवर रोग का कारण बन सकती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि मोटापा, मधुमेह और अनियमित जीवनशैली इस बीमारी के सबसे बड़े जोखिम कारक हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि समय रहते जागरूकता, नियमित जांच और जीवनशैली में सुधार बेहद जरूरी है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और वजन नियंत्रण से इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
