Uttrakhand: दो साल में बनाए 10 हजार से अधिक फर्जी आधार कार्ड-पैन कार्ड
रुद्रपुर, अमृत विचार। आधार कार्ड-पैन कार्ड जैसे दस्तावेजों के आधार पर व्यक्ति को भारतीय नागरिकता का प्रमाण माना जाता है। अब उसी फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड का दुरुपयोग करते हुए थाना ट्रांजिट कैंप का इलाका बाहरी व्यक्तियों का गढ़ बनता जा रहा है। यही कारण है कि सीएससी संचालक ने महज दो साल के भीतर हजारों बाहरी व्यक्तियों के फर्जी दस्तावेज बनाकर ऊधमसिंह नगर में प्रवेश करा दिया है। जिसको लेकर पुलिस प्रशासन भी संजीदा हो गई है और एसएसपी ने अंकुश लगाने के लिए रणनीति भी बनानी शुरू कर दी है।
एसटीएफ और थाना ट्रांजिट कैंप पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में फर्जीवाड़ा करने वाले चेतन गंगवार को गिरफ्तार किया है। जब पुलिस ने गंगवार जनसेवा केंद्र पर दबिश दी तो पुलिस ने 42 नग आधार कार्ड, 55 नग पैनकार्ड, 9 हाईस्कूल की अंकतालिका, 11 फोटो पेपर सीट, फिंगर प्रिंट स्कैनर सहित कई ऐसे उपकरण बरामद किए गए। जिनके माध्यम से फर्जी दस्तावेज तैयार किए जाते थे।
पूछताछ में यह भी पता चला है कि चेतन गंगवार दो साल पहले ही गड्डा कॉलोनी शिमला बहादुर आया था और जन सेवा केंद्र की आड़ में फर्जी दस्तावेज बनाने का धंधा करता था। प्रारंभिक तफ्तीश में अभियुक्त फर्जीवाड़ा करने से इंकार करता रहा। मौके से मिले साक्ष्य के आधार पर पुलिस का मानना है कि अभियुक्त ने दो साल के अंदर बिलासपुर, रामपुर, बहेड़ी और बरेली के रहने वाले 10 हजार से अधिक लोगों के फर्जी दस्तावेज बनाये हैं। जिसकी तस्दीक करना बेहद जरुरी है।
अब सवाल यह उठता है कि हजारों की तादाद में दस्तावेज बनाकर घनी आबादी में आए बाहरी व्यक्तियों में कितने अपराधी हैं। यह कहना मुश्किल है। जिसको लेकर एसएसपी अजय गणमति कुंभार ने खुलासा करते हुए बताया कि रणनीति बनाकर पुलिस की टीम फर्जी दस्तावेज बनाने वालों को चिह्नित करेगी और उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई करेगी। अब देखना यह है कि पुलिस प्रशासन का यह दावा कितना कारगर साबित होगा। यह आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन मामला बेहद गंभीर है। जिस पर अंकुश लगाना जरूरी है।
दो आधार कार्ड पर एक ही नंबर
रुद्रपुर। एसटीएफ व पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में पुलिस को उस वक्त संदेह हुआ। जब काउंटर पर दो आधार कार्ड रखे हुए थे। जिस पर राजा निवासी वार्ड दो का आधार कार्ड नंबर 4895 8797 4499 अंकित था, जबकि कुलदीप वार्ड दो का आधार नंबर 4894 8544 5464 अंकित था। दोनों आधार कार्डों में लगे बार कोड को आधार स्कैनर ऐप में स्कैन करने पर आधार संख्या 5039 नाम चेतन कुमार निवासी अन्चौरा किरमचा रामपुर यूपी आया। जिससे यह पक्का हो गया कि अभियुक्त चेतन गंगवार ने अपने आधार कार्ड का बारकोड दोनों आधार कार्ड पर कूटरचित कर बनाया है।
धड़ल्ले से बन रही थी फर्जी मार्कशीट
रुद्रपुर। दबिश के दौरान फर्जी अंकतालिका का बनाने का पक्का सबूत उस वक्त देखा गया। जब हाईस्कूल की एक अंकतालिका माध्यमिक शिक्षा परिषद यूपी की निकली। बार कोड को स्कैन करने पर पता चला कि अंक तालिका में अभ्यर्थियों के नाम में काफी भिन्नता है और हम उम्र की अभ्यर्थियों का नाम अंकतालिका में एडिट कर हुबहु अंकतालिका बना कर दी जाती है। अभियुक्त का कहना था कि फर्जी दस्तावेज बनाने वाला उसे मुंह मांगी रकम देता था। पुलिस ने मौके से सात हाईस्कूल व एक इंटरमीडिएट की फर्जी अंकतालिका भी बरामद की।
तो क्या घनी आबादी में संचालित है गिरोह
रुद्रपुर। सिडकुल में नौकरी पाने की चाह रखने वाला हो या फिर चुनाव आने पर फर्जी मतदान करने का उद्देश्य भी हो सकता है। जिस प्रकार महज अभियुक्त चेतन ने दो साल के अंदर हजारों की तादाद में फर्जी दस्तावेज तैयार कर दिए हैं। उससे साफ है कि थाना ट्रांजिट कैंप की घनी आबादी के फायदा उठाकर फर्जी दस्तावेज बनाने का गिरोह सक्रिय है। जो चंद पैसों की खातिर संविधान और निर्वाचन नियमों की धज्जियां उड़ा रहा है। जिस का आधार आने वाले चुनावों और जिले की कानून व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। कारण जो आधार कार्ड व्यक्ति को भारतीय नागरिकता का प्रमाण देता है और मताधिकार का अधिकार देता है। इस फर्जी आधार कार्ड का दुरुपयोग भी हो सकता है।
खेल ऐसा कि नाबालिग को बना देता था बालिग
रुद्रपुर। फर्जी दस्तावेज बनाने वाला चेतन गंगवार जहां नियमों को ताक पर रखकर बाल श्रम की खुलेआम धज्जियां उड़ाई है। कारण पुलिस की प्रारंभिक पड़ताल में यह भी पता चला है कि सिडकुल में नौकरी करने के लिए 18 साल से ऊपर का होना जरुरी है, लेकिन कई दस्तावेज ऐसे मिले हैं कि जिसमें नाबालिग किशोरियों की मार्कशीट, आधार कार्ड में जन्म तिथि बदलकर उन्हें बालिग बना दिया जाता था। पुलिस ने अपनी तफ्तीश को तेज कर दिया है।
