कैंपस में पहला दिन: सीखने का उद्देश्य और सपनों को नई दिशा

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
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कॉलेज का पहला दिन जीवन के उन यादगार क्षणों में से एक होता है, जो समय बीतने के साथ और भी मूल्यवान हो जाता है। मेरे जीवन में यह दिन तब आया, जब मैंने क्राइस्ट चर्च कॉलेज में बीएससी बायोलॉजी स्ट्रीम में प्रवेश लिया। यह केवल एक नए संस्थान में दाखिला नहीं था, बल्कि जीवन की दिशा तय करने वाला एक महत्वपूर्ण पड़ाव था। उस सुबह मन में उत्साह और संकोच दोनों भाव मौजूद थे। नई पोशाक, हाथ में जरूरी कागजात और मन में भविष्य को लेकर कई सपने- सब कुछ नया-सा लग रहा था। जैसे ही कॉलेज परिसर में प्रवेश किया, वहां का ऐतिहासिक वातावरण, विशाल भवन और अनुशासित चहल-पहल ने गहरा प्रभाव डाला। चारों ओर अलग-अलग स्थानों से आए छात्र थे, जिनकी आंखों में भी मेरे ही जैसे सपने और उम्मीदें झलक रही थीं।

बीएससी बायोलॉजी स्ट्रीम में प्रवेश लेने का निर्णय मेरे लिए विशेष महत्व रखता था। विज्ञान के प्रति रुचि और जीवन की जैविक प्रक्रियाओं को समझने की जिज्ञासा मुझे इस विषय तक ले आई थी। पहली कक्षा में बैठते समय मन में यह एहसास गहराता जा रहा था कि अब पढ़ाई का स्तर और दृष्टिकोण दोनों बदलने वाले हैं। जब शिक्षक कक्षा में आए, तो उनके अनुभवपूर्ण शब्दों और विषय के प्रति समर्पण ने हमें तुरंत प्रभावित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बायोलॉजी केवल पाठ्यपुस्तकों का विषय नहीं, बल्कि जीवन को समझने की कुंजी है। धीरे-धीरे सहपाठियों से परिचय हुआ। 

नाम पूछने से शुरू हुई बातचीत कब मित्रता में बदल गई, यह पता ही नहीं चला। प्रयोगशाला, विभागीय गलियारे और कैंटीन, हर जगह नई बातचीत, नई सीख और नए रिश्ते आकार लेने लगे। उस दिन यह अनुभव हुआ कि कॉलेज केवल शैक्षणिक ज्ञान का केंद्र नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण का सशक्त मंच है। आज जब उस पहले दिन को याद करता हूं, तो क्राइस्ट चर्च कॉलेज में बीएससी बायोलॉजी स्ट्रीम में लिया गया प्रवेश गर्व और आत्मविश्वास से भर देता है। कॉलेज का पहला दिन वास्तव में जीवन की उस यात्रा की शुरुआत था, जिसने सोचने की दृष्टि, सीखने का उद्देश्य और भविष्य के सपनों को एक नई दिशा दी।-राहुल चंद्रा , पूर्व महामंत्री, इनकम टैक्स बार एसोसिएशन, कानपुर