संपादकीय: पारदर्शी जांच की उम्मीद
महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेता अजित पवार की विमान दुर्घटना में हुई असामयिक मृत्यु ने राज्य ही नहीं, राष्ट्रीय स्तर पर भी गहरी संवेदना और सवालों का वातावरण निर्मित किया। किसी भी हाई-प्रोफाइल दुर्घटना के बाद स्वाभाविक रूप से संशय और आशंकाएं जन्म लेती हैं। ऐसे में यक्ष प्रश्न यही है कि क्या दुर्घटना के वास्तविक कारण निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ सामने आ पाएंगे। इस संदर्भ में केंद्र सरकार और नागरिक उड्डयन मंत्रालय का रुख भरोसा जगाने वाला है।
दुर्घटना की जांच का दायित्व ‘एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो’ यानी एएआईबी को सौंपा गया है, जो अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन आईसीएओ के मानकों के अनुरूप कार्य करता है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी तरह तकनीकी, साक्ष्य-आधारित और राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त होगी। यह घोषणा स्वयं इस बात का संकेत है कि सरकार इस मामले को औपचारिक प्रक्रिया के रूप में नहीं, बल्कि संस्थागत विश्वसनीयता की कसौटी के रूप में देख रही है। तकनीकी स्तर पर हुई प्रगति इस प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ करती है।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने पुष्टि की है कि डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर या डीएफडीआर से डेटा सफलतापूर्वक डाउनलोड कर लिया गया है। यह डेटा विमान की गति, ऊंचाई, इंजन की स्थिति और पायलट के तकनीकी इनपुट्स का विस्तृत रिकॉर्ड प्रस्तुत करता है। इस आधार पर एएआईबी ने 30 दिनों के भीतर प्रारंभिक जांच रिपोर्ट जारी करने की घोषणा की है। समयबद्ध रिपोर्टिंग की यह सार्वजनिक प्रतिबद्धता पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा सकती है, हालांकि कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर यानी सीवीआर से डेटा निकालने में तकनीकी चुनौतियां सामने आई हैं, विशेषकर दुर्घटना के बाद लगी आग के कारण।
इसके बावजूद सरकार ने स्पष्ट किया है कि विशेषज्ञों और निर्माता कंपनी की सहायता ली जा रही है, ताकि उपलब्ध प्रत्येक तकनीकी स्रोत का उपयोग किया जा सके। यह दृष्टिकोण इस बात को रेखांकित करता है कि जांच एजेंसियां किसी भी तथ्य को अधूरा छोड़ने के पक्ष में नहीं हैं। इस बीच विपक्ष की ओर से, विशेषकर एनसीपी (एसपी) की नेता सुप्रिया सुले द्वारा पारदर्शी और औपचारिक जांच की मांग की गई है।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसी मांगें स्वाभाविक हैं। उल्लेखनीय यह है कि सरकार ने इन आवाज़ों को प्रतिरोध के रूप में नहीं देखा, बल्कि जांच की निष्पक्षता और विधिक प्रक्रिया को दोहराते हुए सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। इससे यह संकेत मिलता है कि इस मामले को राजनीतिक विवाद के बजाय सार्वजनिक विश्वास के प्रश्न के रूप में लिया जा रहा है। सरकार द्वारा संबंधित विमानन संचालन और रख-रखाव प्रक्रियाओं की समीक्षा तथा आवश्यक ऑडिट की पहल भी की गई है।
कुल मिलाकर अजित पवार विमान दुर्घटना की जांच तकनीकी संस्थाओं की क्षमता और सरकार की नीयत दोनों की परीक्षा है। अब तक के संकेत, डेटा रिकवरी, समयबद्ध रिपोर्ट की घोषणा और विशेषज्ञ सहयोग, यह दर्शाते हैं कि प्रक्रिया को गंभीरता और विधिक अनुशासन के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। यह जांच न केवल सत्य को सामने लाएगी, बल्कि सार्वजनिक विश्वास को भी सुदृढ़ करेगी।
