कानपुर : फर्जी डिग्री रैकेट को लेकर एसआईटी करेगी 14 विश्वविद्यालयों के कर्मचारियों से पूछताछ

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Published By Deepak Mishra
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कानपुर। उत्तर प्रदेश की कानपुर पुलिस फर्जी मार्कशीट और डिग्रियां दिलाने वाले सिंडिकेट का भंडाफोड़ होने के बाद अब उन सफेदपोश का बेनकाब करेगी जो पर्दे के पीछे आपराधिक वारदात को अंजाम दे रहे थे। संयुक्त पुलिस आयुक्त विपिन ताडा ने बताया कि पिछले दिनो किदवई नगर क्षेत्र में विभिन्न विश्वविद्यालयों की फर्जी मार्कशीट और डिग्री दिलाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ पुलिस ने किया था।

इस मामले की तह में जाने के लिये पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के निर्देश पर 14 सदस्यीय एसआईटी (विशेष जांच दल) का गठन किया गया है। यह टीम अब उन सफेदपोश लोगों की पहचान करेगी, जो पर्दे के पीछे से इस शिक्षा माफिया को संचालित कर रहे थे।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि दो दिन पहले पुलिस ने इस गिरोह के मास्टरमाइंड शिक्षक शैलेंद्र को गिरफ्तार कर पूछताछ की थी। जांच में सामने आया कि उसने एडमिशन एजेंट के रूप में शुरुआत की और धीरे-धीरे नौ राज्यों की 14 यूनिवर्सिटियों में अपना नेटवर्क फैला लिया।

ताडा ने बताया कि पूछताछ में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। सिंडिकेट बीटेक, बी.फार्मा और एलएलबी जैसी डिग्रियां दिलाने के लिए 40 प्रतिशत कमीशन लेता था, जबकि 60 प्रतिशत हिस्सा विश्वविद्यालयों के क्लर्क और कर्मचारियों को दिया जाता था। हालिया छापेमारी में पुलिस ने 900 से अधिक फर्जी मार्कशीट और डिग्रियां बरामद की थीं।

गठित एसआईटी टीम एडिशनल डीसीपी कानपुर दक्षिण के नेतृत्व में संबंधित 14 विश्वविद्यालयों के क्लर्कों और कर्मचारियों से गहन पूछताछ करेगी। जांच का मुख्य उद्देश्य इस पूरे नेक्सस में शामिल लोगों की पहचान करना, उनकी भूमिका स्पष्ट करना और गिरोह के काम करने के तरीके का खुलासा करना है।

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