यूपी की ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी का 'ग्रोथ मल्टीप्लायर’ बनीं महिलाएं, प्रदेश की अर्थव्यवस्था में बढ़ी भागीदारी
लखनऊ, अमृत विचार: प्रदेश की तेज रफ्तार अर्थव्यवस्था के पीछे महिलाओं की बढ़ती भागीदारी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीते नौ वर्षों में राज्य की महिला श्रम बल भागीदारी दर 13 प्रतिशत से बढ़कर 36 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इस बदलाव ने न केवल रोजगार संरचना को मजबूत किया है, बल्कि राज्य की आर्थिक वृद्धि को भी नई गति दी है।
इसी अवधि में प्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। वर्ष 2017 में जहां जीएसडीपी करीब 13 लाख करोड़ रुपये थी, वहीं 2026–27 में इसके 36 लाख करोड़ रुपये की ओर अग्रसर होने का अनुमान है। अर्थशास्त्र के सिद्धांत के अनुसार, महिला श्रम भागीदारी में हर एक प्रतिशत की वृद्धि से जीएसडीपी में 0.5 से 1 प्रतिशत तक अतिरिक्त उछाल आता है और उत्तर प्रदेश में यह सिद्धांत व्यवहार में साकार होता दिख रहा है।
महिलाओं की आय बढ़ने से घरेलू उपभोग में वृद्धि हुई है, जिसका सीधा लाभ एमएसएमई, सेवा क्षेत्र और स्थानीय बाजारों को मिला है। ग्रामीण स्वयं सहायता समूहों, डेयरी व कृषि आधारित उद्योगों से लेकर शहरी सेवाओं तक महिलाएं अब ‘ग्रोथ मल्टीप्लायर’ की भूमिका निभा रही हैं। इससे उत्पादन क्षमता, श्रम उत्पादकता और राज्य के टैक्स बेस, तीनों में समानांतर विस्तार हुआ है।
ट्रिलियन डॉलर लक्ष्य की निर्णायक कड़ी
नीतिगत स्तर पर महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास और स्वरोजगार कार्यक्रमों के विस्तार से आर्थिक भागीदारी का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। यदि यही रफ्तार बनी रही, तो ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने में महिलाओं की भूमिका निर्णायक साबित होगी।
